202 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
इस तरह रुपये के सममूल्य में 2 वर्ष तक परिवर्तन करने के बाद, जैसे इनका कोई सामाजिक प्रभाव नहीं पड़ा हो सैक्रेट्री ऑफ स्टेट ने 30 मई 1919 को वैलिंगटन स्मिथ की अध्यक्षता में एक नई मुद्रा समिति की नियुक्ति की जो स्थिर स्वर्ण विनिमय प्रतिमान सुनिश्चित करने की दिशा में सिफारिशें करे। छः महीने के गंभीर विचार विमर्श के बाद बहुमत ने निम्नलिखित रिपोर्ट दी ख्1, ः
( i ) उद्देश्य यह होना चाहिए कि रुपये की स्थिरता को पुनः प्राप्त किया जाए और व्यावहारिक रूप से यथासंभव शीघ्र तारीख से मुद्रा प्रणाली पुनः स्वचालित ढंग से काम करने लगे।
( ii ) यह स्थायी संबंध स्वर्ण से होना चाहिए न कि स्टर्लिंग से।
( iii ) रुपये के तुल्य स्वर्ण इतना पर्याप्त ऊंचा होना चाहिए कि जहां तक व्यावहारिक हो, उससे यह आश्वासन मिले, कि रुपया अपने वर्तमान वजन और शुद्धता के बावजूद एक प्रतीक मुद्रा रहे, अथवा दूसरे शब्दों में उसमें विद्यमान चांदी का मूल्य विनिमय मूल्य से अधिक न हो।
‘‘(समिति ने कहा कि) बहुत सावधानीपूर्वक विचार-विमर्श के बाद हम सर्वसम्मति से (सिवाय हमारे एक सदस्य के जिसने अलग रिपोर्ट पर हस्ताक्षर किए हैं) सिफारिश करते हैं कि रुपये और स्वर्ण के बीच ऐसा स्थिर संबंध होना चाहिए कि एक विदेशी विनिमय और आंतरिक प्रचलन दोनों के लिए एक रुपया 11.30016 ग्रेन शुद्ध स्वर्ण के बराबर होना चाहिए अर्थात् रुपया दो शिलिंग (स्वर्ण) के समकक्ष होना चाहिए।
अल्पमत रिपोर्ट में इसी पुरानी बात को दोहराया गया कि कम विनिमय दर को प्रोत्साहन दिया जाए और अधिक विनिमय दर पर दंड लगाया जाए। इसमें कहा गया कि पुरानी दर कायम रखी जाए अर्थात् 15 रु. का सोने का पौंड था 11.30016 ग्रेन ट्राय शुद्ध स्वर्ण का हो और यह सिफारिश की कि दो रुपये का चांदी का नया सिक्का जारी किया जाए जिसकी शुद्धता पुराने रुपये के मुकाबले कम हो जब तक कि न्यूयार्क में चांदी की दर 92 सेंट से अधिक रहे। ख्2,
2 फरवरी 1920 की घोषणाओं के अनुसार भारत सचिव ने और भारत सरकार ने समिति के बहुमत की सिफारिशें स्वीकार कर लीं जिसने प्रति रुपया 7.53344 ग्रेन की पुरानी समता समाप्त कर के 11.30016 ग्रेन ट्राय की नई समता स्वीकार कर ली। अब क्या रुपये ने स्वर्ण के साथ अपनी नई समता को कायम रखा है?
देखिए रिपोर्ट पी.पी.सी.डी. 1920 की 527, पैरा 59
रिपोर्ट, पृष्ठ 41