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विनिमय मानक की स्थिरता

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तालिका XLII

रुपये का मूल्य ”ास

तिथि­ भारत (बम्बई) में भारत (बम्बई) में भारत में

सोने की छड़ की चांदी का प्रति मूल्यों का

180 ग्रेन के एक 100 तोला मूल्य­ सूचक अंक

तोला की कीमत 1913=100­

­ रु. आने­ रु. आने­ ­

1914­ 24.10­ 65.11­ --­ 1915­ 24.14­ 61.2­ 112­ 1916­ 27.2­ 78.10­ 125­ 1917­ 27.11­ 94.10­ 142­ ­ (जुलाई)34.0­ (16 मई)117.2­ 178­ 1918­ 28­ (28 नवंबर) 82.10­ --­ 1918 अगस्त ­ 30.0­ --­ --­ 1918 सितम्बर­ 32.4­ --­ --­ 1919 मार्च­ 32.0­ 113.00­ 200­

इस तरह चांदी की कीमत में वृद्धि रुपये के मूल्य ”ास के फलस्वरूप हुई कीमतों में आम वृद्धि का ही एक भाग था। कमेटी चाहती थी रुपये का स्वर्ण मूल्य बढ़ाकर 10 रुपये प्रति सावरेन कर दिया जाए। जबकि बाजार में सावरेन खरीदने के लिए इससे दुगुने रुपये देने पड़ते थे। स्वर्ण के रूप में रुपये का इतना ज्यादा ”ास हो गया था कि कमेटी की रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने से कुछ महीने पहले कलकत्ता के अखबार ‘‘स्टेट्समैन’’ ने लिखा थाःµ

‘‘यदि आप देश में एक सावरेन ले कर उतरें तो सरकार इसे आप से ले लेगी

और आप को बदले में 11 रु. 3 आने दे देगी। यदि आप देश के अंदर पहुंच

जाएं और आपके पास सावरेन हों जिसे आप करेंसी आफिस ले जाएं तो आपको

उसके लिए 15 रुपये मिल जाएंगे। दूसरी ओर यदि आप उसे बाजार में ले जाएं

तो 21 रुपये देने वाले ग्राहक भी मिल जाएंगे।’’

इस तथ्य को भारत सरकार के वित्त विभाग ने भी स्वीकार किया था कि इसमें बहुत काफी सच्चाई है। ख्1, इसके बावजूद कमेटी ने सिफारिश की कि रुपये को 2 शिलिंग के स्वर्ण मूल्य के समान माना जाए। कमेटी ने रुपये को चांदी के साथ संकुचित कर दिया और रुपये को प्रचलन में बनाए रखने तथा स्वर्ण का विनिमय मूल्य

  1. देखें माननीय मि. सिन्हा के प्रश्न के उत्तर में माननीय मि. हार्वर्ड का उत्तर 23 सितम्बर 1919, एस.

एल.सी.पी खंड 57 पृष्ठ 417