6. विनिमय मानक की स्थिरता - Page 231

216 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

चैम्बर ऑफ कॉमर्स की मुद्रा के मोर्चे पर मिली पूर्ण असफलता की व्याख्या देते हुए लिखा था। ख्1, इसमें पहले वाणिज्य को बढ़ावा देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय ऋण स्वीकार करने की चर्चा करने के बाद पत्र में आगे कहा गया थाःµ

‘‘परंतु बाकी चीजों के लिए वह (अर्थात् भारत सरकार) अब घटनाओं

को स्वाभाविक तौर पर होने पर तथा निर्यात की उत्साहजनक परिस्थितियों पर

और उसी के साथ आयात कम होने पर ही निर्भर रह सकती है ताकि विनिमय

को मजबूत बनाया जा सके। अनुभव ने दिखा दिया है कि विश्वास की वर्तमान

परिस्थिति में स्थिरता प्राप्त नहीं की जा सकती......... परंतु भारत सरकार को इस

बात का कोई कारण नजर नहीं आता कि स्वाभाविक परिस्थितियों को ही......

.विनिमय दर उस स्तर पर क्यों न तय करने दी जाए जिसकी वकालत करेंसी

कमेटी की रिपोर्ट में की गई है।’’

इन दोनों विचारों मेंसे कौन-सा विचार ठीक है? क्या रुपये की कम क्रयशक्ति इसकी गिरावट की जिम्मेदार है या प्रतिकूल व्यापार संतुलन इसका जिम्मेदार है? अब यहां यह बात तुरंत बता दी जानी चाहिए कि प्रतिकूल व्यापार संतुलन को विनिमय में गिरावट का उत्तरदायी बताना, भारत के सरकारी दस्तावेजों में एक नई चीज है। 1873 और 1893 के बीच विनिमय में आम तौर पर गिरावट आती रही परंतु किसी सरकारी अधिकारी ने कभी प्रतिकूल व्यापार संतुलन को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया। और क्या प्रतिकूल व्यापार संतुलन का सिद्धांत 1907, 1914 और 1920 में आने वाली गिरावट की अंतिम रूप से व्याख्या कर सकता है? सबसे पहले यदि सब दृश्य और अदृश्य वस्तुओं को ध्यान में रखा जाए तो किसी भी देश के व्यापार की तुलन पत्र (बैलेंसशीट) हमेशा संतुलित रहनी चाहिए। असल में तो इंडियन पेपर करेंसी रिपोर्टों के साथ जो प्रबंध संलग्न होता है जिनमें आमतौर पर यह बताया जाता है कि प्रतिकूल संतुलन विनिमय में गिरावट का कारण होता है, उसमें यह बताने में कभी चूक नहीं होती कि भारत से कुछ भी निष्कासन नहीं होता। इसमें एक-एक वस्तु के साथ यह दिखाया जाता है कि किस तरह भारत से होने वाले निर्यात की अदायगी आयात से होती हैµ उन वर्षों में भी जब विनिमय में गिरावट आ जाती है। सबसे विचित्र बात यह है कि वहीं ये रिपोर्टें प्रतिकूल व्यापार संतुलन की चर्चा बार-बार दुहराते हैं। यदि यह मान लिया जाए कि भारत के समूचे निर्यात की अदायगी हो जाती है तो यह समझना कठिन है कि संतुलन के बारे में और कुछ कहने की जरूरत क्या रहती है। व्यापार के जिस भाग का परिसमापन धन द्वारा किया जाता

  1. यह पत्र टाइम्स ऑफ इंडिया के 20 नवम्बर 1920 के अंक में प्रकाशित हुआ था। पृष्ठ 14 कालम 1