6. विनिमय मानक की स्थिरता - Page 249

234 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अर्थात् उसका अपसरण कर दिया जाए उसे रद्द कर दिया जाए। इस प्रक्रिया के बारे में महत्त्वपूर्ण प्रश्न यह नहीं है कि किस सीमा तक उसे निष्पादन किया जाता है अपितु यह है कि किस सीमा तक उसे प्रचलन से निकाला जाता है। वर्तमान काल में प्रचलित विचारधारा के अनुसार बिना कोई प्रश्न उठाए यह स्वीकार कर लिया जाता है कि यह भारत सरकार और सैक्रेटरी ऑफ स्टेट के स्वर्ण साधनों पर निर्भर करता है। सबसे पहले हम यह स्पष्ट कर दें कि ये स्वर्ण साधन कि स्थानों पर स्थित हैं ओर किस तरह वितरित किए जाते हैं। यहां यह स्मरणीय है कि स्वर्ण साधन (1) कागजी मुद्रा रिजर्व, (2) स्वर्ण प्रतिमान रिजर्व और (3) सैक्रेटरी ऑफ स्टेट के रोकड़ शेष के बीच वितरित रहते हैं। जब विनिमय का संकट पैदा हो तो इन साध नों पर जिन्हें तीन ‘‘रक्षा पंक्तियां’’ कहने का रिवाज बन गया है, सरकार आराम से निर्भर कर सकती है। परन्तु क्या से सचमुच ऐसी हैं? यदि दो सब मुक्त साधन हों अर्थात् विनियोजित साधन न हों, तभी अपसरण के लिए ये निर्भरता योग्य हो सकते हैं। किस हद तक ये गैर-विनियोजित होते हैं? क्या सैक्रेटरी ऑफ स्टेट कागजी मुद्रा के भंडार के पीछे रखे स्वर्ण को वापस ले सकता है? हां ले सकता है। परन्तु तब उसे स्वर्ण की जगह बदले में और कुछ रखना पड़ेगा या उतने नोट रद्द करने पड़ेंगे। क्या सैक्रेटरी ऑफ स्टेट अपने रोकड़ शेष में से स्वर्ण ले सकता है। हां, ले सकता है। परन्तु तब उसे अपने खजाने को भरने के लिए उधार लेना पड़ेगा या भारत सरकार के बूते पर खर्च करेगा बशर्तें कि कोई उसके बिल खरीदने को तैयार हो जो रुपये की मुद्रा जारी करने के समान है। कागजी मुद्रा के रिजर्व में और रोकड़ शेष में जो स्वर्ण है, उसका कोई उपयोग नहीं होता क्योंकि उससे रुपये की मुद्रा को रद्द नहीं किया जा सकता। जब इसके मूल्य में गिरावट आती है तब यही उसके मूल्य को पुनः स्थापित करता है। इसलिए यह कहना बिल्कुल मूर्खतापूर्ण है कि प्रतिदिन की प्रभावकारिता ऐसी ही है जैसे सैक्रेटरी ऑफ स्टेट के पास स्वर्ण साधन हों। यह विषय बहुत महत्त्वपूर्ण है और यहां एक उदाहरण देना गलत न होगा। मान लीजिए ‘क’ के पास रुपये हैं और वह उनकी जगह स्वर्ण चाहता है। इसके लिए वह तीन काउंटरों पर जा सकता हैµ (1) रोकड़ शेष काउंटर के मुख्य नियंत्रक के पास, (2) कागज मुद्रा रिजर्व के मुख्य मुद्रा नियंत्रक के पास, अथवा (3) स्वर्ण प्रतिमान के अभिरक्षक के पास। यदि ‘क’ पहले काउंटर पर जाएगा तो उसका क्या नतीजा होगा? रोकड़ शेष उतनी कम हो जाएगी। यदि यह मान लिया जाए कि रोकड़ शेष न्यूनतम है, जैसा कि होना भी चाहिए तो नियंत्रक को अपनी ऋण शोधन क्षमता बनाए रखने के लिए इंडिया पर एक बिल ड्रा करेगा और इस तरह स्वर्ण के बदले मिले रुपयों को पुनः प्रचलन में डाल देगा ताकि मुद्रा का संकुचन न हो। यदि ‘क’ मुद्रा नियंत्रक के पास जाता है, तब क्या होता है? नियंत्रक उसे स्वर्ण दे देता है, पर इस पूर्व कल्पना पर की कागजी मुद्रा का खाता एक अलग अनुविहित खाता है