6. विनिमय मानक की स्थिरता - Page 251

236 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अधिनियम XL, V द्वारा अस्थायी की जगह स्थायी रूप से परिवर्तन कर दिया और उसके उपबन्ध इस तरीके से बदल दिए गए कि सरकार अपनी निर्मित सिक्यूरिटियों को बन्द करके मुद्रा को न्यूनतम डिग्री तक रद्द कर सकती थी। तथापि सरकार के बजट में घाटे के कारण ऐसा भी नहीं किया गया।

परन्तु यदि ऐसे अविवेकपूर्ण कार्य नहीं भी दोहराए गए तब भी यह तो सच है कि स्वर्ण प्रतिमान रिजर्व के अनुसार जितना मुमकिन है, सरकार उससे अधिक मात्रा में सिक्कों को बन्द नहीं कर सकती। यदि वह रिजर्व असफल हो जाए तो सरकार के पास दो ही साधन बचते हैंµ (1) रुपयों को पिघला दिया जाए और इस प्रकार जो चांदी की धातु को सोने की जगह बेच दो और मुद्रा में तब तक और संकुचन करते जाओ जब तक कि उसका मूल्य पुनः स्थापित न हो जाए_ अथवा (2) सोना उधार लिया जाए। स्पष्ट है कि दोनों ही तरीके काफी महंगे हैं। रुपये को चांदी के रूप में बेचने से हानि होगी ही बशर्तें कि बिक्री के समय चांदी का मूल्य उस समय की अपेक्षा अधिक हो जब वह सिक्के बनाने के लिए खरीदी गई थी। दूसरी प्रक्रिया अर्थात् उधार लेने के तरीके को जिससे एक रिजर्व फंड बन सके जिससे मुद्रा का प्रचलन बन्द किया जा सके, आसानी से नहीं अपनाया जा सकता। वास्तव में ये तरीके इतने महंगे हैं और इसका निश्चित प्रमाण है कि यदि वे अपनाए गए तो उससे विनिमय मानक में निश्चित रूप से अस्थिरता आ जाएगी इस लिए सरकार ने कभी इस पर गंभीरतापूर्वक विचार ही नहीं किया कि विनिमय के संकट के समय उससे निजात पाने के लिए एक संभावित तरीके के रूप में उन्हें अपनाया जाए। तथापि यह निश्चित लगता है कि सरकार भी यह मानती है कि गोल्ड स्टैंडर्ड रिजर्व अपने आप में विनिमय को बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं है। जैसा कि हम देखते हैं, 1907-8 के वर्ष से लंदन और भारत के बीच सरकारी अधिशेष के वितरण में पूर्ण परिवर्तन हो गया है। उस समय तक सैक्रेटरी ऑफ स्टेट की यह नीति थी कि केवल उतना ही निकाला जाए जितना घरेलू खजाने को वित्त पोषित करने के लिए जरूरी हो। उस तारीख के बाद यह पद्धति अपनाई गई थी कि उतना निकाला जाए जितने कि भारत सरकार व्यवस्था कर सके, और चूंकि भारत सरकार वित्तीय मामलों में सर्वोच्च है इसलिए उसने अधिक कर लगाकर तथा बचत का बजट बना कर काउंसिल आहरणों के लिए बड़ी मात्रा में धन प्रदान किया। इसका नतीजा यह हुआ कि सैक्रेटरी ऑफ स्टेट के पास रोकड़ शेष बहुत बढ़ गया। ख्1, घरेलू

खजाने के लिए वित्त-प्रबंध करने के ऐसे अनूठे तरीके अपनाने के लिए सरकार

  1. आंकड़ों के लिए देखिए अध्याय VII

  2. तुलना करें मेमोरेंडम आन इंडिया ऑफिस बैलेंसिज 1913 का सी.डी. 6619