6. विनिमय मानक की स्थिरता - Page 261

246 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

महत्वपूर्ण है कि खूंटी पर बांध देने का इस पर क्या प्रभाव पड़ता है। ख्1, इसे बांधने का बुनियादी प्रभाव यह होता है कि एक निर्धारित कीमत पर घरेलू मुद्रा की जगह विदेशी मुद्रा प्राप्त करके विदेशी सामान खरीदने की अनुमति देना, और यह निर्धारित कीमत उस कीमत से अधिक होती है जो दोनों देशों की मुद्राओं की क्रयशक्ति के आधार पर निर्धारित की जाती है। बांध देने से सस्ती कीमत पर हासिल की गई विदेशी मुद्रा से लोगों को विदेशी सामान खरीदने से विदेशी मूल्य बढ़ कर घरेलू मूल्यों के स्तर तक पहुंचने लगते हैं। इस तरह विनिमय दर स्थिर इसलिए नहीं होती कि उसे बांध दिया गया है बल्कि इसलिए होती है कि दोनों देशों के बीच मूल्य स्तर एक नए साम्य पर पहुंच गया है। मुख्य रूप से विनिमय दर इसलिए स्थिर है क्योंकि यह कृत्रिम क्रय शक्ति की समानता है। यह ऐसा बना रहेगा कि नहीं इस बात पर निर्भर करता है कि घरेलू मूल्यों में उतार-चढ़ाव वैसा रहता है। यदि घरेलू कीमतों में वृद्धि विदेशी मूल्य के बोधन के बावजूद अधिक होती है, तो यह प्रक्रिया निश्चित रूप से भंग होगी। इसी बात को ध्यान में रखते हुए विनिमय के बारे में आयरिश कमेटी ने जारी की मुद्रा की सीमा के बारे में शर्त लगाई थी और यह एक बहुत महत्वपूर्ण कृति है। भारतीय मुद्रा के संदर्भ में इस शर्त का उल्लेख न करना आयरिश कमेटी की रिपोर्ट के सर्वोत्तम भाग की उपेक्षा करने के समान है।

मि. लिंडसे ने अपना विनिमय मानक बनाने में उत्पन्न कठिनाइयों पर कोई ध्यान क्यों नहीं दिया, इसका कारण यह है कि भले ही एक नई प्रणाली के प्रवर्तक के रूप में उन्होंने प्रसिद्धि पा ली हो, परंतु मुद्रा के मूल्य के वास्तविक सिद्धांत के बारे में वे अनभिज्ञ थे। न तो वे उन्हें और न ही 1890 के दशक में भारतीय विनिमय की कठिनाइयों ख्2, को दूर करने के उपाय करने की योजनाएं बनाने वाले अनेकों मुद्रा के व्यापारी यह समझते थे कि विनिमय को स्थिर करने की समस्या असल में उसकी मात्रा पर नियंत्रण करके मुद्रा की क्रयशक्ति को स्थिर रखने की समस्या होती है। ख्3, स्वर्ण विनिमय मानक में इस तथ्य की उपेक्षा की जाती है कि दीर्घकाल में तो मुद्रा की सामान्य क्रयशक्ति ही अंततः विनिमय मूल्य को तय करती है इसका उद्देश्य है विनिमय को स्थिर करना और क्रय शक्ति की समस्या को लटकने देना। वास्तव में नीति यह होनी चाहिए कि मुद्रा की सामान्य क्रय शक्ति को स्थिर रखा जाए और

  1. तुलना करेंःµ टी.ई. तिगोरी का सारगर्भित वक्तव्य, फारेन एक्सचेंजिज पृष्ठ 85

  2. देखें अध्याय IV

  3. तुलना करेंµ फाउलर कमेटी के सामने दिए गए मि. लिंडसे के साक्ष्य से जिसमें उन्होंने इस बात पर

जोर दिया है कि एक्सचेंज का प्रचलन में मुद्रा की मात्रा से कोई संबंध नहीं होता।