6. विनिमय मानक की स्थिरता - Page 265

250 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अगले अध्याय में हम इस बात की चर्चा करेंगे कि किस प्रकार अवमूल्यन अधिक बड़ी बुराई है। अभी तो हम बैंक ऑफ इंग्लैंड के इस अनुभव को लेंगे। हमारे पास यह तथ्य मौजूद है कि बिना विशिष्ट अवमूल्यन के भी सामान्य अवमूल्यन हो सकता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए विनिमय मानक के पक्षधर इस बात पर गर्व नहीं कर सकते कि लम्बी-लम्बी अवधियों के दौरान रुपये ने विशिष्ट अवमूल्यन के चिह्न नहीं दिखाए। एक बैंक नोट जो नितांत रूप से अपरिवर्तनीय है और जिसे जारी करते समय कोई नियमन ध्यान में नहीं रखे गए और इसके बावजूद वह 13 वर्ष तक सममूल्य पर बना रहा, रुपये का यह अनुभव आस्थगित प्रणाली के पक्ष में कहीं अधिक जाता है बजाय विनिमय मानक के। दूसरी बात की अपेक्षा पहली बात अधिक आश्चर्यजनक है। इस बात के बावजूद कि यद्यपि रुपये का मूल्य स्वर्ण के रूप में मापा जाता है और स्वर्ण का मूल्य ”ास हो रहा था, इसके बावजूद रुपयों का मूल्य बना रहा। यह पहले दिए गए इंग्लैंड में सामान्य कीमतों के आंकड़ों से स्पष्ट होता है और थोड़ी सी यह आशा कि किसी न किसी किस्म की परिवर्तनीयता भी आज नहीं तो आगे चल कर होगी हालांकि बैंक ऑफ इंग्लैंड के नोटों में उसका कोई स्थान नहीं था, तथापि शायद ही किसी व्यक्ति ने आस्थगित अवधि की मुद्रा प्रणाली की प्रशंसा की होगी या उसे न्यायोचित ठहराया होगा, यद्यपि इसके कारण काफी लम्बे समय तक विशिष्ट मूल्य ”ास नहीं हुआ।

स्वर्ण के रूप में मूल्य ”ास मापने का तरीका अपेक्षाकृत हानिरहित ही रहता बशर्ते कि उसे एक और ऐसी कल्पना का आधार न बना लिया जाता जिस पर विनिमय मानक टिंका हुआ है अर्थात् मुद्रा का सामान्य और विशिष्ट मूल्य ”ास एक-दूसरे से संबंधित नहीं हैं। इसके मुकाबले यह अनुरोध करना जरूरी है कि विनिमय मानक के पक्षधरों के लाभ के लिए बैंक ऑफ इंग्लैंड के अनुभव से यह सीखें कि यद्यपि उनका उतार-चढ़ाव बिल्कुल सामंजस्यपूर्ण नहीं है तथापि वे निश्चित रूप से एक-दूसरे से संबंधित हैं। इस बात को सार रूप में इस तरह बताया जा सकता है कि जब मुद्रा का सामान्य मूल्य ”ास हुआ है, तब अन्य बातें सामान्य रहने पर विशिष्ट मूल्य ”ास होना अवश्यम्भावी है यद्यपि इसमें समय लग सकता है यदि सामान्य मूल्य ”ास एक सीमा को पार कर जाए। सामान्य मूल्य ”ास होने के बाद विशिष्ट मूल्य ”ास में कितना समय लगेगा, यह कई प्रकार की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। लगातार पानी में वृद्धि होने पर झील की सतह की तरह सामान्य मूल्य ”ास का असर भिन्न-भिन्न वस्तुओं पर भिन्न-भिन्न समय में पड़ता है जो इस पर निर्भर करता है कि सामान्य काल में उसकी मांग अपेक्षाकृत कितनी शक्तिशाली रहती है। यदि स्वर्ण की मांग मुद्रा के लिए अथवा औद्योगिक इस्तेमाल के लिए नहीं हो रही तो स्वर्ण के रूप में मुद्रा का मूल्य ”ास विलम्ब से होगा। यह तो विदेशी भुगतान के लिए ही स्वर्ण की