7. स्वर्ण मानक की ओर वापसी - Page 281

266 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

हटाया जा सकता। इस देश में बैंकिंग की सुविधाएं बहुत अपर्याप्त हैं। इसलिए

हमारा धन बैंकों के पास या सरकारी खजाने में तेजी से नहीं लौटता। इसलिए जो

अतिरिक्त धन देश के अंदरूनी इलाकों में भेजा जाता है, वह इधर-उधर पानी

के छोटे-छोटे तालाबों की तरह पड़ा रहता। जो जमीन को दल-दल में बदल देता

है। मेरा विश्वास है कि दो रास्ते बन्द हो जाने के कारण तीसरे रास्ते के जरिए

धन की बहुतायत होने से कीमतें बढ़ जाती हैं।’’

यदि स्वर्ण भारतीय मुद्रा का एक भाग होता, तो न केवल यह विस्तार की आवश्यकताएं पूरी कर लेता बल्कि इससे मुद्रा का इतना अधिक संकुचन भी हो सकता जिसका रुपये से पहले ज्ञान तक नहीं था। स्वर्ण, रुपये की अपेक्षा मूल्य का बढि़या मान इसलिये होता कि पहले वाले का विस्तार भी हो सकता है और संकुचन भी_ जबकि दूसरे का केवल विस्तार हो सकता है, संकुचन नहीं। जो कुछ पहले कहा जा चुका है, यह उसी को दूसरी भाषा में कहने के समान है कि भारतीय मौद्रिक मान न तो स्वर्ण मान है और न ही स्वर्ण विनिमय मान अपितु इसमें तो अपरिवर्तनीय रुपया मान के सारे गुण हैं जो कि ‘बैंक स्थगन’ की अवधि में कागजी पौंड के थे और स्थानीय कीमतें अतिरिक्त रूप से बढ़ना दोनों प्रणालियों की सादृश्यता का अकाट्य प्रमाण है। ये गुण इन तीनों प्रणालियों में हैं। बुलियन रिपोर्ट में इन्हें इन शब्दों में कीमत बढ़ने का कारण बताया गया है ख्1, ःµ

‘‘एक ऐसे देश में जिसने ऐसी मुद्रा अपनाई है जिसका दूसरे देशों को निर्यात

नहीं हो सकता अथवा इच्छा होते ही जिसे ऐसे सिक्के में नहीं बदला जा सकता

जिसका निर्यात हो सके, तो स्थानीय कीमतों में अतिरिक्त बढ़ोत्तरी के कारण उस

देश में अतिरिक्त मुद्रा का प्रचलन होता है।’’

इसलिए यदि हम भारत में बढ़ी हुई कीमतों को कुछ कम करना चाहते हैं, तो सबसे जरूरी काम यह करना चाहिए कि स्वर्ण जैसी किसी निर्यात योग्य मुद्रा को भारत की मीट्रिक प्रणाली का एक प्रतिस्थानी बना दिया जाए।

चैम्बरलेन कमीशन ने भारत में स्वर्ण मुद्रा चलाने के विरूद्ध तर्क देने में काफी पटुता दिखाई। ख्2, इसने जो तर्क पेश किए वे इस प्रकार थेµ (1) भारत के लोग स्वर्ण की जमाखोरी शुरू कर देंगे और संकट के समय उसे निकालेंगे नहीं_ (2) भारत इतना गरीब देश है कि सोने जैसी महंगी धातु के सिक्कों का रख-रखाव नहीं कर सकेगा_ (3) भारत के लोग इतने कम सौदे करते हैं कि सोने के सिक्कों के प्रचलन की अनुमति नहीं दी जा सकती_ और (4) भारत के लोगों के लिए सर्वोत्तम कागजी मुद्रा है जो रुपये में परिवर्तनीय हो क्योंकि यह भारत के लोगों के लिए सबसे कम

  1. प्रो. कैनन का पुनर्मुद्रण, पृष्ठ 17

  2. रिपोर्ट, पृष्ठ 15-19। यही तर्क मि. केन्स के ट्रीटिज के अध्याय- IV में भी मिलेंगे।