स्वर्ण मानक की ओर वापसी
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खर्चीली है और स्वर्ण मुद्रा जारी करने से भारत के लोग कागजी मुद्रा और रुपये की मुद्रा दोनों के विरूद्ध हो जाएंगे। जमाखोरी का हौआ खड़ा करना काफ़ पुरानी बात है और इस तर्क में कुछ दम हो सकता है बशर्तें कि इसके पीछे कोई भी नियम न हो। परन्तु असलियत कुछ और ही है। मुद्रा तो सबसे अधिक बिक्री योग्य वस्तु होती है और किसी भी सुव्यवस्थित मीट्रिक प्रणाली में इस बात की संभावना सबसे कम होती है कि लघु अवधि में इसका मूल्य ”ास हो जाएगा। इसलिए लोग इसे हमेशा जमा रखते हैं और इसे मूल्य के भंडार के रूप में रखते हैं। परन्तु मूल्य के भंडार के रूप में रखने वाला व्यक्ति इस बात की तुलना करता है कि आज इससे वह जितनी उपयोगिताएं ले सकता है, भविष्य में उसके मुकाबले कितनी ले सकता है और यदि आज की उपयोगिता के मुकाबले भविष्य की उपयोगिता बहुत अधिक है और ऐसा करते समय वह अवधि और जोखिम को ध्यान में रखता है, तो वह मुद्रा को अपने पास जमा रखेगा। दूसरी ओर यदि वर्तमान उपयोग भविष्य के उपयोग के मुकाबले अधिक महत्त्वपूर्ण है, तो वह धन जमा नहीं रखेगा। ऐसी परिस्थिति में यह समझना कठिन है कि भारत के लोगों के लिए स्वर्ण मुद्रा की जमाखोरी पर आपत्ति की जाए। यदि वे सोने की जमाखोरी करते हैं तो इसका मतलब यह है कि या तो वे वर्तमान
खरीदारी पर पैसा नहीं लगाना चाहते या फिर उनके पास और कोई घटिया मुद्रा भी है और पहले वे उसे खर्च करना चाहते हैं। दूसरी ओर यदि उन्हें वर्तमान में खरीदारी करनी है और उनके पास स्वर्ण से कोई घटिया मुद्रा नहीं है, तब वे सोने की जमाखोरी नहीं कर सकते। ऐसे मौके आए हैं जब अवसर पड़ने पर भारत से बहुमूल्य धातुओं का निर्यात हुआ है ख्1, जिससे सिद्ध होता है कि भारत के लोगों की जमाखोरी की आदत कोई ऐसी अज्ञात वस्तु नहीं है जितना अक्सर समझा जाता है और यदि कुछ अवसरों ख्2, पर उन्होंने निर्यात योग्य मुद्रा की जमाखोरी की जबकि उन्हें उसे दे देना चाहिए था, तो यह लोगों का नहीं अपितु मुद्रा प्रणाली का दोष है जिसमें कुल मुद्रा भंडार के अलग-अलग भाग मूल्य के भंडार के रूप में एक जैसे बढि़या नहीं हैं। जमाखोरी का तर्क, यदि इसे तर्क माना जाए तो यह तर्क तो किसी भी देश के व्यक्तियों पर लागू हो सकता है, विशेष रूप से केवल भारतवासियों पर नहीं।
भारत में स्वर्ण मुद्रा के विरूद्ध दिया जाने वाला दूसरा तर्क भी पहले तर्क से अधिक जोरदार नहीं है। यदि स्वर्ण मुद्रा प्रचलन से निकल जाती है तो इसका कारण
- देखिए चैम्बरलेन कमीशन को मि. दलाल द्वारा दिया गया मेमोरेंडम, परिशिष्ट, खण्ड- III, सं. XXXIII,
पृष्ठ 673.75 इस विषय और इससे सम्बद्ध विषयों के लिए।
- भारत के लोगों पर 1907-8 के संकट के दौरान यह इलजाम लगाया गया था। तथापि यह बात ध्यान में
रखनी चाहिए कि इस संकट के समय भी प्राइवेट खाते से कुछ सोना निर्यात किया गया था।