7. स्वर्ण मानक की ओर वापसी - Page 284

स्वर्ण मानक की ओर वापसी

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रूप से परिवर्तनीय होता, तो खतरा सीमित मात्रा में होता। परन्तु लेखे की इकाई को परिवर्तनीय कागजी मुद्रा का खतरा उतना ही बढ़ सकता है जितना अपरिवर्तनीय मुद्रा का होता है जब तक कि उस इकाई को संरक्षित करके अंतिम प्रतिदान की धातु से, उस धातु में मुक्त परिवर्तनीयता करके, उससे नीचे नहीं गिरने दिया जाता। ख्1, रुपया ऐसी किसी परिवर्तनीयता द्वारा संरक्षित नहीं है और चूंकि कमीशन नहीं चाहता था कि, यह इस तरह संरक्षित हो, तो कमीशन को यह समझ लेना चाहिए था कि वह रुपये को सामान्य रूप में वस्तुओं के रूप में और इस तरह स्वर्ण के रूप में सममूल्य में बने रहने की संभावनाओं को कागजी मुद्रा के विस्तार की बढ़ा करके भारी हानि पहुंचा रहा था चाहे वह कागजी मुद्रा पूरी तरह परिवर्तनीय हो, ठीक उसी तरह जैसे वह उसे पूरी तरह अपरिवर्तनीय रहा था। परन्तु कमीशन मित्तव्ययता के प्रश्न पर इतना अभिभूत और मूल्य की स्थिरता के विचारों से आत्मसंयम खो बैठा था कि दरअसल उसने एक ऐसे परिवर्तन का सुझाव दे दिया कि भारतीय कागजी मुद्रा ‘स्थायी इश्यू प्रणाली’ की जगह ‘स्थायी आनुपातिक प्रणाली’ पर चले। ख्2, मित्तव्ययता की खातिर कमीशन ने प्रश्न के इस पहलू की उपेक्षा कर दी, यह इस बात का एक और प्रमाण है कि जहां तक भारतीय मुद्रा की क्रय शक्ति की स्थिरता का प्रश्न है, उसे कमीशन ने वही सरसरी दृष्टि से देखा।

ऊपर जो कुछ कहा गया है, यदि उसमें कुछ बल है तो स्वर्ण मुद्रा केवल ‘भावना’ का प्रश्न है और न ही यह केवल ‘महंगा विलास’ अपितु एक आवश्यकता है जिसे भारतीय मूल्य को बनाए रखने के महान हित ने प्रेरित किया और इस तरह हद तक, चाहे थोड़ा ही सही वह बढ़ती हुई कीमतों में अवांछनीय दुष्परिणामों से भारतीय जनता के कल्याण की रक्षा करता है।

इस तरह हम यह देखते हैं कि भारत सरकार की मूल योजना के प्रारूप से हट कर जिसे फाउलर कमेटी की स्वीकृति प्राप्त थी, चैम्बरलेन कमीशन ने कितनी बड़ी गलती की। परन्तु इससे प्रश्न पैदा होता है कि वह आदर्श इतनी निर्दयता से क्यों कुचला गया? यदि फाउलर कमेटी ने प्रस्ताव किया था कि स्वर्ण को भारतीय मुद्रा बनाया जाए, तो फिर भारतीय मुद्रा स्वर्ण की क्यों न बनी रही? यह नहीं कहा जा सकता कि स्वर्ण के प्रवेश के द्वार बन्द कर दिए गए हैं क्योंकि इसे विधिमान्य मुद्रा घोषित किया गया है। प्रो. फिशर के शब्दों में जहां तक कथन का सवाल है भारत के मुद्रा जलाशय में स्वर्ण के आवागमन को चांदी की अपेक्षा कहीं अधिक स्वतंत्रता दी गई है। चांदी के रूप में रुपया इस जलाशय में बहुत ही संकीर्ण वाल्व के रास्ते

  1. इस विषय पर एक सुन्दर विवेचन के लिए देखें ‘मनीः इट्स कनेक्शन विद राइजिंग एंड फालिंग प्राइसिज’’

- ले. प्रो. केनन, तीसरा संस्करण, पृष्ठ 47-8

  1. रिपोर्ट, धारा 112