7. स्वर्ण मानक की ओर वापसी - Page 299

284 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

एक क्षण के लिए वक्त की हल्की टिप्पणियों को छोड़ते हुए, सच्चाई यह है कि 1900 में भारत में स्वर्ण मुद्रा थी। परन्तु 1910 के अंत में स्थिति यह थी, यह स्वर्ण मुद्रा नहीं चल रही थी। ऐसा क्या हुआ जिससे यह अंतर आया? और कुछ नहीं सिवाय इसके कि 1893-1900 के बीच रुपये नहीं ढाले गए थे परन्तु 1900-10 के बीच भारी मात्रा में रुपये ढाले गए। पहली अवधि में रुपये बनाने का प्रलोभन वास्तव में काफी अधिक था। विनिमय काफी स्थिर नहीं था और सरकार को ‘‘होम चार्जिज’’ चुकाने के लिए काफी बड़ी मात्रा में रुपयों की आवश्यकता थी। सुप्रीम लेजिस्लेटिव कौंसिल के एक माननीय सदस्य ख्1, ने तो पूछ ही लिया थाµ

‘‘क्या इस बात पर कोई आपत्ति है कि सरकार अपनी ओर से टकसालें चलाए? यह देखते हुए कि चांदी की कीमतें कम हैं और सर्राफे और रुपये की कीमतों में भारी अंतर है, तब क्या सरकार स्वयं अपने लिए रुपये नहीं बनाएगी ताकि उससे होने वाले पर्याप्त मुनाफे से वर्तमान घाटे को काफी कुछ पूरा किया जा सके? मुझे तो राजस्व प्राप्ति का एक वैध स्रोत लगता है जिससे हम अपनी वित्तीय स्थिति काफी कुछ सुधार सकेंगे।’’

परन्तु सर जेम्स वेस्टलैंड ख्2, ने, जो उस समय भारत के वित्त के मुखिया थे, उत्तर दियाµ ‘‘मुझे घोर एक्सीलैसी काउंसिल के व्यापारिक सदस्यों में से एक द्वारा रखे गए प्रस्ताव को देख कर सचमुच थोड़ा आश्चर्य हुआ कि हम आजकल की कम कीमत पर चांदी खरीद कर इसके सिक्के ढाल कर रुपये की बढ़ी हुई कीमत पर बेचें... मैं निश्चित रूप से इस प्रलोभन में फंसने वाला नहीं। इसके बाद फिर 1898 जब मि. लिंडसे के कुछ अनुयायियों ने इच्छा प्रगट की कि मीट्रिक कठिनाइयों पर काबू पाने के लिए, सरकार को सिक्के ढालने चाहिए, तब सर जेम्स वेस्टलैंड ख्3, ने निम्नलिखित टिप्पणी कीµ

‘‘...हमारे विचार से सिल्वर स्टैंडर्ड अब भूतकाल की चीज बन चुकी ख्3, है। यह तो मामला ‘वेस्टीजिया नला रिट्रोसेम’ का है अब हमारे सम्मुख केवल यही समस्या है कि गोल्ड स्टैंडर्ड को पुनः सर्वोत्तम ढंग से कैसे प्राप्त किया जाए। हम मुक्त टकसालों की स्थिति पर वापस नहीं लौट सकते। उस स्थिति तक वापस जाने के केवल दो रास्ते हैं। या तो हम सामान्यतया जनता के लिए टकसालें खोल सकते हैं

  1. यह सदस्य और कोई नहीं, माननीय फजुलभाई विशराम थे जो बम्बई के माने हुए चित्रकार थे। उनके

भाषण के लिए देखें वित्तीय वक्तव्य, 1894-95, पृष्ठ 96

  1. वित्तीय वक्तव्य, 1894-95 पृष्ठ 123

  2. वित्तीय वक्तव्य, 1898-99 पृष्ठ 169