7. स्वर्ण मानक की ओर वापसी - Page 300

स्वर्ण मानक की ओर वापसी

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और या हम स्वयं अपने लिए उनमें सिक्के ढाल सकते हैं। दोनों ही हालतों का तात्पर्य यह निकलेगा कि रुपयों का मूल्य कम होकर चांदी के मूल्य के पास पहुंच जाएगा। यदि टकसालें जनता के लिए खोल दी गईं तो यह गिरावट तेजी से उठ जाएगी। यदि टकसालों में केवल सरकार ने सिक्के ढालने शुरू किये, तो यह गिरावट कम तेजी से आएगी, परन्तु आएगी जरूर।’’

माननीय सी.ई. डॉकिन्स ने भी सरकार द्वारा सिक्के ढालने की इस परियोजना की उतनी ही जोरदार निन्दा की। जब उनको प्रलोभन दिया गया कि क्योंकि सिक्के ढालने से लाभ होगा और उन्हें इस पर मौन सम्मति दे देनी चाहिए, तब उन्होंने उत्तर दिया ख्1, µ

‘‘मैं सोचता हूं कि मुझे अपने माननीय मित्र से प्रार्थना करनी चाहिए कि चांदी पर होने वाले लाभ को किसी की आंख के सामने भले ही वह बहुत पुण्यात्मा सरकार क्यों नहीं विशेष रूप से बार-बार न धूम रखें। यदि एक बार ऐसे लाभ हमारे कार्यकलापों का भाग बन गए, तो फिर तो स्थिरता को दूर से ही नमस्कार करना पड़ेगा।’’

सरकार के इस संकल्प का कि वह सिक्के नहीं ढालेगी, एक और उदाहरण उन कारणों की जांच से मिलता है कि सरकार ने अनिश्चित मात्रा में निश्चित दरों पर कौंसिल बिलों की बिक्री की जिम्मेदारी कभी भी क्यों नहीं संभाली। चैम्बरलेन कमीशन ने तर्क दिया था कि सरकार यह जिम्मेदारी इसलिए नहीं संभाल सकती क्योंकि वह निश्चित दर की बात नहीं मान सकती और हो सकता है कि वे उसे सममूल्य से भी कम दर पर बेचने पड़ें। यह बात सच है जहां इस अपराध को स्वीकार करना है कि बहुत अधिक मात्रा में रुपये बनाने से सरकार की स्थिति निर्बल हो गई है। परन्तु यह स्पष्टीकरण सरकार ने 1900 में उस समय नहीं दी जब उसे पहले पहल वह जिम्मेदारी संभालने के लिए दी गई थी। सरकार यह पूरी तरह जानती थी कि ये बिल अनिश्चित रूप से बेचते रहने का मतलब यह होगा कि रुपये अनिश्चितकाल तक ढाले जाते रहें। उन्होंने यह जिम्मेदारी उठाने से इसलिए इंकार कर दिया क्योंकि वह रुपये ढालना नहीं चाहती थी। इसी मूल कारण को माननीय मि. डॉकिन्स ख्2, ने उन लोगों को स्पष्ट शब्दों में व्यक्त कर याद दिला दिया जो सरकार को ऐसी जिम्मेदारी उठाने को कहते थेµ

‘‘इसके परिणामस्वरूप सरकार का चांदी के सिक्कों का रिजर्व तेजी से उस बिन्दु के पास आ पहुंचा जहां असीमित मात्रा में (कौंसिल बिलों का) अंतरण करना असंभव

  1. वित्तीय वक्तव्य, 1894-95, पृष्ठ 173

  2. तुलना करें उनका बजट भाषण, वित्तीय वक्तव्य, 1910-1, पृष्ठ 7