7. स्वर्ण मानक की ओर वापसी - Page 305

290 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

प्राप्त करने का सबसे त्वरित तरीका है कि स्वर्ण के रूप में उधार लेना। परंतु

करेंसी कमीशन इस तरीके का उग्र विरोधी था। इसलिए यह प्रश्न अनुत्तरित ही

रह जाता है कि ‘‘स्वर्ण का आवश्यक भंडार कैसे प्राप्त किया जाएगा?’’

‘‘17. मैं इस कठिन समस्या का कोई बना बनाया हल नहीं सुझा सकता, परंतु

मैं कुछ सुझाव देना चाहता हूं और मुझे विश्वास है कि यदि उन्हें स्वीकार कर

लिया गया तो कठिनाई का काफी कुछ हल हो सकेगा। मेरा प्रस्ताव है कि एक

विशेष ‘गोल्ड एक्सचेंज फंड’ बनाया जाए जो वैसे तो स्वतंत्र हो परंतु विनिमय

प्रयोजन की असाधारण परिस्थितियों में उसका उपयोग करेंसी रिजर्व के स्वर्ण

साधनों के साथ मिलकर किया जा सके। इस कोष की स्थापना उस लाभ में

से की जाए जो 7,000,000 पौंड से अधिक की रकम के मूल्य के स्वर्ण को

रुपयों में ढालने से होगा।’’

क्या अभी भी इस बारे में कोई संदेह है कि रुपयों के सिक्के ढालने का सच्चा कारण क्या था? जो लेखक यह कहते हैं कि रुपये के सिक्के इसलिए ढाले जा रहे हैं कि लोग सोना पसंद नहीं करते तो यह कहा जा सकता है कि उन्होंने भारत में विनिमय मान की उत्पत्ति का इतिहास ध्यान से नहीं पढ़ा।

परंतु क्या यह सर एडवर्ड ला की दुष्ट बुद्धि थी जिसमें एक सुदृढ़ मुद्रा प्रणाली को रुपये के सिक्के ढालने की अपनी विनाशकारी नीति से कमजोर बना दिया? सरकार के विरोधी और उसके समर्थक सभी इस बात से सहमत हैं ख्1, कि यह काम फाउलर कमेटी के सिफारिशों से हट कर था। तथापि भारतीय मुद्रा के बारे में जितना भी सरकारी या गैर-सरकारी साहित्य उपलब्ध है, उसमें यह कहीं स्पष्ट नहीं किया गया कि सरकार फाउलर कमेटी की सिफारिशों से सही-सही कितना हटी है। फाउलर कमेटी की सिफारिशें क्या थीं? यह आमतौर पर बताया जाता है (और भारत सरकार को इससे शर्म आनी चाहिए) कि फाउलर कमेटी ने कहा था इसे दोहराया गया है।

‘‘हम ब्रिटिश सावरेन को भारत मेंं एक वैध मुद्रा और चालू सिक्का बनाने के पक्ष में हैं। हमारा यह भी विचार है कि उसी के साथ भारतीय टकसालों को भी बिना किसी सीमा के सोने के सिक्के ढालने की छूट होनी चाहिए...... जैसा कि हम स्वर्णमान की स्थापना करना चाहते हैं और ऐसी मुद्रा चाहते हैं जो स्वर्ण के मुक्त आगम और निर्णय के सिद्धांत पर आधारित हो इसलिए हम इन उपायों को अपनाने की सिफारिश करते हैं।

  1. यहां तक कि चैम्बरलेन कमीशन ने भी कहा था कि सरकार फाउलर कमेटी के आदर्शों से हट गई

है।