7. स्वर्ण मानक की ओर वापसी - Page 309

294 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

में बदलने का दायित्व स्वीकार कर लेना चाहिए। इतना सरल उपाय ढूंढ लेने के बाद अगला प्रश्न यह था कि भारत सरकार को स्वर्ण रिजर्व कहां से मिलेंगे? ऐसा स्वर्ण रिजर्व बनाने का एक तरीका था उधार लेना। परंतु किसी कारणवश कमेटी को यह उपाय रूचिकर नहीं लगा। इसका कारण शायद यह है कि कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में एक जगह इस काम के लिए भारत सरकार की भर्त्सना की थी ख्1, ।

‘‘अपने पास उपलब्ध साधनों को प्रयोग में लाओ, जबर्दस्त कृत-संकल्प मित्तव्ययता करो और अपने स्वर्ण दायित्वों को बढ़ने से रोको।’’ अथवा इसलिए कि उधार लेना एक दुश्चक्र होता है-

‘‘स्वर्णमान स्टैंडर्ड की स्थापना या उसके रखरखाव के लिए।’’ ख्2,

इसलिए कमेटी उधार लेने के प्रस्ताव के पक्ष में नहीं थी। परंतु यदि उधार लेकर स्वर्ण रिजर्व नहीं बनाया जाना था तो फिर और कौन से तरीके से बनाया जाता? लगता है कि कमेटी रिजर्व बनाने के किसी वैकल्पिक साधन को ढूंढने की समस्या के कारण काफी परेशान थी कि अचानक इसके एक सदस्य को उस क्षण एक तरीका सूझा जब उसकी बुद्धि पूरी तरह काम नहीं कर रही थी, और उसने यह प्रस्ताव किया कि भला सरकार को रुपये ढालने की अनुमति क्यों न दी जाए? यदि इसकी अनुमति दे दी गई तो सरकार बिना उधार लिए आसानी से स्वर्ण रिजर्व बना सकेगी और फिर विदेशों में अदायगी के लिए परिवर्तनीयता के लिए अपना दायित्व पूरा कर सकेगी। यह प्रस्ताव इतना निर्दोष लगता था कि कमेटी ने इसका हार्दिक स्वागत करते हुए इसे अपना लिया और इस रिपोर्ट का एक भाग बना दिया और राहत की सांस ली जिसका बिना शंका के इसे लिखने की जोरदार भाषा से पता चलता है।

कमेटी ने सरकार को रुपये ढालने की अनुमति देने के जो कारण बताए थे, वे ठीक भी हो सकते हैं और नहीं भी। परंतु सच्चाई यह है कि कमेटी यह नहीं समझ सकी कि इस सिफारिश में क्या चीज फंसी है। सबसे पहली बात तो यह है कि यदि रुपये के सिक्कों का ढालना जारी रहा तो स्वर्णमान और मुद्रा का क्या होगा? जब हम देखते हैं कि कमेटी एक ओर तो स्वर्णमान और मुद्रा के आदर्श की बात करती है और दूसरी ओर रुपये ढालने की बात_ तो ऐसी दशा में इस प्रकार की कमेटी के प्रति बहुत आदर क्या संभव है, जितना कि बाजैट का बैंक ऑफ इंग्लैंड के डाइरेक्टरों के प्रति था जिन्होंने 25 मार्च, 1819 को निम्नलिखित कुख्यात प्रस्ताव पास किया थाःµ

  1. रिपोर्ट, पैरा 70

  2. देखें कैम्पबेल हॉलैंड एंड म्योर रिपोर्ट में पृष्ठ 27 पर रिजवेशंस टु दी रिपोर्ट।