296 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कितना भी हानिकारक क्यों न हो, कमेटी को उसके इस अविवेकपूर्ण कार्य के लिए क्षमा अवश्य करना पड़ेगा क्योंकि वह इस बात से डरती थी कि टकसाल बंद होने के कारण मुद्रा में अचानक संकुचन आ जाएगा, और चूंकि इसने सोने को सामान्य वैध मुद्रा नहीं बनाया है, इसलिए इसे आवश्यकता पड़ने पर मुद्रा जोड़ने के लिए आवश्यक व्यवस्था करनी पड़ेगी और उसने सोचा कि उसका सर्वोत्तम तरीका यही होगा कि सरकार को रुपये के सिक्के ढालने की शक्ति मिले। सरकार के सौभाग्य से उसे कुछ समय अर्थात 1898 तक नए सिक्के शामिल करने की आवश्यकता नहीं पड़ी और इसलिए इस शक्ति का उपयोग करने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ी परंतु जब ऐसी आवश्यकता पड़ी, तो जैसा कि पहले बताया जा चुका है, सरकार ने उस शक्ति का उपयोग करने से मना कर दिया और यह विचार अपनाया कि भारतीय मुद्रा में वृद्धि करने के लिए रुपये के सिक्के ढालने के बाजय, सोने की बड़ी मात्रा को आने देना चाहिए। सरकार मि. लिंडसे की घोर विरोधी थी जो उस समय आंदोलन कर रहे थे कि सरकार को विवश किया जाए कि वह रुपये के सिक्के ढाल कर मुद्रा में आवश्यक वृद्धि करें जो सुरक्षित और किफायती था। फाउलर कमेटी इसलिए गठित की गई थी कि एक ओर भारत सरकार और दूसरी ओर मि. लिंडसे के विवाद में निर्णय दे जिसमें सरकार स्वर्ण के सिक्के बना कर और मि. लिंडसे चांदी के सिक्के बना कर मुद्रा में वृद्धि करना चाहते थे। यदि सरकार इस बात के लिए उत्सुक होती कि सोना अधिक मंगाने की जगह अधिक रुपये बना कर मुद्रा में वृद्धि की जाए, तो फाउलर कमेटी नियुक्त करने की आवश्यकता ही न पड़ती। उसे यह शक्ति हर्शल कमेटी ने पहले से ही दे दी थी। यह तो चूंकि सरकार उस गलत दी गई शक्ति का उपयोग नहीं करना चाहती थी, इसलिए नई कमेटी को अपील करना आवश्यक हो गया। कमेटी के सामने तात्कालिक समस्या यह थी कि मुद्रा की कमी के कष्टों से बचाने के लिए मुद्रा का विस्तार कैसे किया जाए? कमेटी ने अपनी रिपोर्ट के एक भाग में इसके लिए सुझाव दिया कि स्वर्ण को वैध मुद्रा बना दिया जाए ताकि कोई भी ऋणी जिसे रुपये नहीं मिल रहे, ऋणदाताओं को अपनी अदायगी सोने में करने का विकल्प मिलना चाहिए। यदि सोने को सामान्य रूप से विनिमय का माध्यम बनने दिया जाए, तो क्या चांदी के सिक्के ढालने का प्रस्ताव बेकार का नहीं था जिसकी कोई जरूरत नहीं थी?
तीसरे, क्या गोल्ड रिजर्व बनाने के तरीके के रूप में रुपये के सिक्के बनाने के प्रस्ताव को रुपये का मूल्य बनाए रखने के लिए युक्तियुक्त समझा जा सकता है? रुपये का मूल्य बनाए रखने की एक आवश्यक शर्त यह है कि वे सीमित मात्रा में जारी किए जाएं। कमेटी ने विद्वतापूर्वक इस बात की चर्चा की कि जारी करने की मात्रा की सीमा बांध देने से शिलिंग किस प्रकार मूल्य को बनाए रख रहा है। परन्तु क्या यह समझा गया कि शिलिंग की मात्रा पर किस तरह सीमा बांध कर रखी जाती है। यदि यह सच है कि शिलिंग का मूल्य बनाए रखने के लिए वैध मुद्रा की सीमा