7. स्वर्ण मानक की ओर वापसी - Page 312

स्वर्ण मानक की ओर वापसी

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नहीं, अपितु उसकी कुल मात्रा की सीमा बांधनी होती है तो फिर शिलिंग असीमित मात्रा में जारी क्यों नहीं किया जाता? शिलिंग के सिक्के ढालना उसी तरह लाभकारी है जैसे रुपये के सिक्के ढालना। ब्रिटिश सरकार इसे असीमित मात्रा में क्यों नहीं ढालती? केवल इसलिए कि शिलिंग असीमित मात्रा में नहीं दिया जा सकता? यदि सरकार अपने चान्सलर ऑफ इक्सचेकर कबीना के मंत्रियों और ढेर सारे अफसरों और बाबुओं को अदा कर सकती जो बदले में अपने फुटकर दुकानदारों, दूधवालों, शराबवालों और कसाइयों को शिलिंग में अदायगी कर सकते, तो शिलिंग अधिक मात्रा में जारी करने से कोई मना नहीं कर सकता। परंतु यह इसलिए है कि कोई भी शिलिंग में असीमित मात्रा में अदायगी नहीं कर सकता, इसलिए वे किसी के पास भी असीमित मात्रा में नहीं रहेंगे। या यों कहिए कि वैध मुद्रा पर सीमा होने के कारण कोई थोक मंडी नहीं है, इसलिए आवश्यकता से अधिक शिलिंग जारी करने से सरकार स्वयं ही रुक जाती है। इसलिए कमेटी का यह तर्क देना गलत था कि वैध मुद्रा पर सीमा लगाने का शिलिंग का मूल्य बनाए रखने से कोई संबंध नहीं। दूसरी ओर, यदि किसी प्रतीक (टोकन) सिक्के का मूल्य बनाए रखने की मुख्य शर्त है जारी किए गए सिक्कों की मात्रा की सीमा तो ऐसी सीमा को प्रभावकारी बनाने का एक तरीका है वैध मुद्रा की सीमा बांध देना।

परिवर्तनीयता के बारे में भी उसके तर्क उतने ही भ्रामक थे। यह कहना कि एक चीज फ्रांस और अमरीका के लिए पर्याप्त है तो वह भारत के लिए भी पर्याप्त होगी तो यह तो ऐसा है कि एक अन्धा दूसरे अंधे का नेतृत्व करे। यह तर्क देना बिल्कुल गलत था कि परिवर्तनीयता की जगह स्वर्ण हीµ

‘‘विदेशी विनिमय की मार्फत आंतरिक उद्देश्यों के लिए समूची मुद्रा को अंकित

मूल्य पर बनाए रखता है।’’

बात बिल्कुल उल्टी है। फ्रांस और अमरीका को अपनी मुद्रा की रक्षा के लिए परिवर्तनीयता की आवश्यकता नहीं थी क्योंकि चांदी के फ्रांक और चांदी के डालर पूर्णतः सीमित मात्रा में होते थे। स्वर्ण के अधिक मात्रा में आगमन से रक्षित होने की जगह जारी की गई मात्रा की सीमा होने के कारण न केवल उनका मूल्य बना रहा अपितु, उन देशों में जितना भी सोना था, उसे भी वहीं रहने की अनुमति हो गई। अब कमेटी को लम्बे टेढ़े-मेढ़े रास्तों व निरर्थक खोज करने की जगह चाहिए यह था कि वह इस बात पर जोर देती कि जब तक जरूरत से ज्यादा मुद्रा जारी करने की सीमा बांधने के अन्य तरीके हैं, तब तक न तो इस बात की जरूरत है कि रुपये के संदर्भ में न तो मुद्रा की अथवा परिवर्तनीयता की सीमा बांधी जाए। वैध मुद्रा या परिवर्तनीयता की सीमा इसीलिए आवश्यक होती है कि वे जारी की गई मुद्रा की मात्रा