7. स्वर्ण मानक की ओर वापसी - Page 313

298 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

की सीमा बांधने का एक साधन होती हैं और यदि जारी की गई मुद्रा की सीमा अन्य तरीकों से बांधी जा सकती हो तो परिवर्तनीयता या वैध मुद्रा की सीमा बांधने का उद्देश्य पूरा हो जाता। अब क्या टकसालें बंद करने से क्या रुपयों की पर्याप्त सीमा न बंध जाती? और यदि टकसालें बंद करने से जारी किए गए रुपयों की सीमा नही बंध जाती तो फिर भला और किस चीज से बंध सकती? क्या टकसालें बंद करना वैसी ही बात नहीं है कि जैसा निश्चित संख्या में कागजी मुद्रा जारी करने के नियमन करने का सर्वविदित सिद्धांत होता है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि ऐसा ही होता है। ऐसी स्थिति में एक ही प्रश्न बचा रहता है कि वर्तमान में रुपयों की प्रचलन मात्रा उस न्यूनतम वैध मुद्रा की मात्रा से स्पष्ट रूप से कम है जो किसी भी समय आंतरिक प्रचलन के लिए जरूरी हो सकता है। भारत सरकार ने यह पहले से ही भांप लिया था कि प्रचलन में रुपयों की मात्रा इस न्यूनतम से अधिक थी और इसीलिए उसने इस बारे में आवश्यक व्यवस्था की थी। 3 मार्च, 1898 के अपने प्रेषण में सरकार ने अपनी योजना की रूपरेखा बताते हुए कहा थाµ

‘‘9..... हम जानते हैं कि असफलता का (रुपये का विनिमय मूल्य बनाए

रखने में) एक मुख्य कारण यह था कि टकसालें बंद करने से पहले ही

हमारे यहां रुपयों का प्रचलन इतना अधिक बढ़ा दिया गया था कि उससे

व्यापार की सभी मांगे पूरी तरह, बल्कि पूरी तरह से ही ज्यादा पूरी हो जाती

और सोने के रूप में उसे और बढ़ाने की कोई गुंजाइश नहीं रह गई थी।.....

दो देशों के बीच विनिमय की निश्चित दर की आवश्यक शर्त यह होती

है कि जब दूसरे देश के मुकाबले एक देश की मुद्रा फालतू हो जाती है,

तो उस आधिक्य को किसी एक समय कम करने के लिए फालतू सिक्कों

को प्रचलन से हटाया जा सकता है_ और इसलिए हम चाहते हैं कि एक

ऐसी स्थिति पर पहुंचे, जब हमारे प्रचलन का माध्यम...... केवल चांदी के

सिक्कों का न बना हो जिनका देश के बाहर कोई मूल्य नहीं होता, बल्कि

उसमें थोड़ा-सा भाग स्वर्ण का भी होना चाहिए जिसका अन्यत्र भी सिक्के

के रूप में प्रयोग किया जा सकता है, और इस तरह वह स्वाभाविक रूप

से वहां पहुंच जाएगा जहां उसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। आजकल

हमारी रुपये की कुल मुद्रा 120 करोड़ रुपये की है जिसमें हमें प्रचलन में

दस करोड़ रुपये की आरक्षित कागजी मुद्रा और जोड़ देनी चाहिए।

‘‘10...... यह सही-सही बताना कठिन है और केवल वास्तविक अनुभव से

इसकी पुष्टि की जा सकती है कि रुपये का आधिक्य कम करने के लिए रुपयों

का प्रचलन कितना घटाया जाना चाहिए।....... परंतु कुछ बातों से आभास होता