7. स्वर्ण मानक की ओर वापसी - Page 318

स्वर्ण मानक की ओर वापसी

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रुपया मुद्रा ने अपना पूंजीगत मूल्य बनाए रखा है? इसका स्वर्ण भाग, जिसे स्वर्ण मान रिजर्व कहा जाता है, उसका निवेश, ब्याज कमाने वाली प्रतिभूतियों में किया जाता है। ब्याज निस्संदेह प्राप्ति का एक अतिरिक्त स्रोत होता है। परंतु क्या इन सिक्यूरिटियों ने अपना पूंजीगत मूल्य बनाए रखा है? कतई नहीं। अब मुद्रा के रुपये वाले आधे भाग को लीजिए। क्या रुपये में लगी धातु ने अपना पूंजीगत मूल्य बनाए रखा है? कई विनोदप्रिय अर्थशास्त्रियों ने ढेर सारे चार्ट और आकृतियां बनाई हैं जिनमें काली रेखा जो रुपये का अंकित मूल्य दिखाती है_ ऊपर की ओर जाती है और लाल रेखा जो रुपये का धातु मूल्य दिखाती है_ वह चांदी का स्वर्ण मूल्य घटने के कारण नीचे को गई हुई है। परन्तु उसका मतलब क्या होता है? सीधा-सादा यह है कि रुपया अर्थ जाने वाली परिसंपदा है और भविष्य किसी तिथि पर इसका वह मूल्य नहीं होगा जो इसके निर्माण के समय समाज को देना पड़ा था। एक पागलची ने जब सुअर भूनने के लिए अपना मकान जला दिया, उसमें उससे ज्यादा मितव्ययता दिखाई थी जितनी भारतीय रुपये की मुद्रा में है। हो सकता है कि चीनी का मकान बिल्कुल टूटी-फूटी हालत में हो और रहने लायक न हो। परंतु स्वर्णमान को चांदी धन में बदलने की बात के बारे में यह नहीं कहा जा सकता क्योंकि हम जानते हैं कि स्वर्ण की अपेक्षा चांदी में निवेश घटिया किस्म का होता है। इस दृष्टि से मुद्रा कतई मितव्ययी नहीं है। ऐसा लगता इसलिए है कि लोग केवल रुपये को देखते हैं। परंतु रुपया मुद्रा की लागत में स्वर्ण मान रिजर्व की लागत जोड़ देने के बाद भी क्या ऐसा कहा जा सकता है कि यदि भारत में रुपया मुद्रा की जगह स्वर्ण मुद्रा होती तो भारत को अधिक स्वर्ण की आवश्यकता पड़ती। इस बात को ध्यान में रखते हुए कि रुपये जारी करने की एक निश्चित सीमा रखने पर स्वर्ण रिजर्व रखने की आवश्यकता नहीं रह जाती, तब चांदी के सिक्कों के निर्माण को बंद करने का एकमात्र परिणाम यह निकलेगा कि सोना आजकल जिसका एक भाग विक्षेप निधि में रहता है और दूसरा रुपया मुद्रा को प्रेषित कर दिया जाता है, बिना इस विनाशकारी और अपव्ययी प्रक्रिया को शिकार बने सीधा प्रचलन में आ जाएगा।

एक मामले में जितने सोने की आवश्यता होगी, दूसरे मामले में उससे अधिक की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसलिए हम निर्भय होकर कह सकते हैं_ जिसे कोई चुनौती भी नहीं देगा कि रुपये के सिक्के ढालना पूरी तरह बंद कर देने से भारतीय मुद्रा सचमुच में किफायती हो जाएगी, कीमतें स्थिर हो जाएंगी, और विनिमय इस तरह सुरक्षित हो जाएगा, जैसा उसे वास्तव में होना चाहिए_ और रुपया यद्यपि अपरिवर्तनीय होगा परंतु वह कोई समस्या नहीं बना रहेगा जैसा कि 1873 से बना हुआ है।