साक्ष्य पर वक्तव्य - Page 334

साक्ष्य पर वक्तव्य

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आ गई थी, यह सब, वास्तव में मुद्रा के रूप में सोने के प्रयोग में

उसकी किफायत के कारण हुआ था। फलतः जैसा कि प्रो. केनन ने

कहा है, ‘‘आसन्न भविष्य में सोना एक ऐसी वस्तु नहीं होगा जिसके

प्रयोग के लिए यह वांछनीय हो कि उसके प्रयोग पर या तो प्रतिबंध

लगाया जाए या किफायत की जाए। पिछली शताब्दी के अंतिम वर्षों

से, इसका उत्पादन इतनी अधिक मात्रा में किया गया है कि वह अपनी

क्रयशक्ति को बनाए रखने में समर्थ नहीं रह सका और इस प्रकार यह

उस समय तक मूल्य का स्थिर मानक नहीं हो सकता जब तक वह

लगातार ऐसे वर्तमान धारकों का पता न लगा ले जो बड़े विशाल भंडार

को रखने के इच्छुक हों या ऐसे नए धारकों को न ढूंढ ले जो सोने के

नए भंडार रखने के लिए उत्सुक हों। युद्ध के पहले, यूरोप में विभिन्न

केन्द्रीय बैंकों ने नई आपूर्ति के एक बहुत बड़े हिस्से को ले लिया था

और सामान्य मूल्यों की वास्तविक वृद्धि को रोक दिया था। यह उसी

प्रकार हुआ जैसे उसे अन्यथा होना चाहिए था हालांकि यह बहुत गंभीर

मामला था।’’ उस मांग के अभाव में अगली सबसे अच्छी बात भारत

तथा पूर्व के देशों में स्वर्ण मुद्रा को आरंभ करने की होगी। स्वर्ण मुद्रा

के इस प्रवेश को स्थिर निर्गम प्रणाली अपनाने से अच्छी तरह प्राप्त

किया जा सकता है बजाय परिवर्तनीय प्रणाली के, क्योंकि पहली प्रणाली

से वास्तविक मुद्रा में सोने के प्रयोग के लिए बाद वाली प्रणाली की

अपेक्षा अधिक गुंजाइश होगी।

  1. इस समस्या के समाधान के लिए चूंकि मेरा यह विचार है, अतः मैं, आवश्यक रुपये, स्वर्णमान निधि के उन्मूलन के पक्ष में हूं, क्योंकि इस रिजर्व का मुद्रा की स्थिरता को बनाए रखने के लिए कोई व्यावहारिक उपयोग नहीं है। मेरा ऐसा विचार क्यों है कि स्वर्णमान निधि का उन्मूलन होना चाहिए, इसका भी एक और कारण है। स्वर्णमान निधि एक लिहाज से विलक्षण है, उदाहरणार्थ परिसम्पत्तियां अर्थात निधि और देयताएं अर्थात रुपये इस तथ्य के कारण खतरनाक रूप में सहसम्बंधित हैं कि रुपये की मुद्रा में वृद्धि के बिना निधि में वृद्धि नहीं हो सकती। यह अशुभ स्थिति इस तथ्य से उत्पन्न होती है कि निधि का निर्माण रुपये के सिक्के बनाने के लाभ से होता है। इसका मूल चूंकि वह होता है इसलिए यह स्पष्ट है कि निधि में वृद्धि केवल, रुपये के सिक्के की मात्रा में वृद्धि के परिणामस्वरूप ही हो सकती है। प्रो. केनन का कहना है ‘‘स्वर्णमान को समझने वाले प्रशासकों तथा विधायकों का प्रतिशत बहुत ही कम है, परंतु इसके उस प्रतिशत से जो स्वर्ण विनिमय प्रणाली को समझते हैं, दस से 20 गुना रहने की संभावना है। स्वर्ण विनिमय प्रणाली की अज्ञानता या भ्रष्टाचार से विकृत होने की संभावना बहुत अधिक होती है और वह