330 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
6062 कल्पना कीजिए (मैं कल्पना से आरंभ करता हूं) कि आपको अपनी
आंतरिक मुद्रा को, एक विनिमय मान के अंतर्गत सोने में या एक विदेशी
मुद्रा, सोने के बराबर परिवर्तित करने के एक दायित्व को स्वीकार करना
है, आपके मत में, इन प्रणालियों की मुद्रास्फीति को रोकने की क्षमता
का जहां तक संबंध है, क्या वह उन्हें उसी समान स्थिति में रखेगा? यह
इस बात पर निर्भर करता है, कि आप किस प्रकार की परिवर्तनीयता को
स्वीकार करते हैं।
6063 मैं मुद्रा प्राधिकारी द्वारा, वह चाहे जो हो, आंतरिक मुद्रा को प्रस्तुत करने
पर सोने में परिवर्तित करने के कानूनी दायित्व या स्वर्णमान वाले देश
में, विदेशी मुद्रा में सोने को प्राप्त करने के साधन को स्वीकार करने की
कल्पना कर रहा हूं? यदि आपका दायित्व यह है कि आप बिना किसी
संशय के टेंडर पर सोने का भुगतान स्वीकार करें, तब मेरा विचार है कि
वह पर्याप्त होगा। ऐसा कहने का मेरा अभिप्राय यह है कि परिवर्तनीयता
अन्तरात्मा के समान है और यह विभिन्न मात्रा व श्रेणी की हो सकती
है, और मुद्रा की मात्रा को नियंत्रित करने की इसकी क्षमता इस बात
पर निर्भर करेगी कि आपके पास किस प्रकार की परिवर्तनीयता है। यदि
आपकी परिवर्तनीयता केवल विदेशी मुद्रा के लिए है तो मेरा निवेदन यह
है कि वह मुद्रा के जारी करने पर एक पर्याप्त प्रतिबंध नहीं होगा।
6064 यदि दायित्व वैसा है जैसा कि आपने अभी बताया है, तो आंतरिक या
देशी मुद्रा को अंतर्राष्ट्रीय भुगतान के साधन के रूप में या तो सोने का या
सोने पर आधारित विदेशी मुद्रा में परिवर्तित करने का, है तो आपकी राय
में मुद्रा की स्फीति के इस खतरे को जिससे हम निपट रहे हैं, रोकने का
पर्याप्त साधन क्यों नहीं है? क्योंकि एक विदेशी मुद्रा, वास्तव में आंतरिक
मुद्रा स्फीति का सूचक नहीं होता। उदाहरणार्थ, भारत में हमने स्वयं के
अनुभव से यह पाया और इस बात का पता, मेरा विचार है, प्रोफेसर कीन्स
ने लगाया है कि यद्यपि एक लम्बे समय रुपये का अनुपात 1 शि. 4 पैंस में
रहा, पर भारत में मूल्य स्तर तथा इंग्लैंड में मूल्य स्तर बहुत अलग-अलग
थे। विनिमय के संबंध में यह नहीं कहा जा सकता कि उसका एक देश
के समूचे मूल्य स्तर के साथ पूर्णतया सामंजस्य है। विनिमय का प्रभाव
केवल ऐसी वस्तुओं पर पड़ता है जिनका प्रवेश अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में होता
है और वास्तव में, प्रत्येक चीज इस बात पर निर्भर करेगी कि उस माल
की मात्रा क्या है और उसका अनुपात क्या है जो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में
प्रवेश करता है और उस माल का क्या है जिसने प्रवेश नहीं किया। यदि
देश की स्थिति ऐसी है कि उसका आंतरिक विदेशी व्यापार की अपेक्षा
अधिक बड़ा है, वास्तव में यदि उसका विदेशी व्यापार नगण्य होता है..।