भारतीय मुद्रा और वित्त के संबंध में 15 दिसम्बर, 1925 को शाही आयोग के समक्ष साक्ष्य - Page 348

भारतीय मुद्रा और वित्त पर शाही आयोग के समक्ष साक्ष्य

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चाहिए, अर्थात किस संबंध में, और दूसरे किस विधि द्वारा ?- यह सोने

की अपेक्षा वस्तुओं के संबंध में अधिक स्थिर होनी चाहिए जिसका प्रयोग

केवल आंतरिक व्यापार के लिए किया जाता है। और मैं यह कहता हूं कि

यह काम, रुपये के सिक्के को पूर्णतया बंद करके और सोने का प्रयोग

निर्धारित करके किया जाना चाहिए।

6073 यदि हम सोने को आंतरिक मुद्रा के लिए प्रेषण के मानक के रूप में

अस्वीकार करते हैं, तो फिर हमें प्रेषण के अन्य कौन-से मानक को अपनाना

चाहिए? - वह मैं वहां पर मैं बता चुंका हूं कि हमें या तो प्रोफेसर फिशर

के क्षतिपूरक मानक को अपनाना चाहिए या प्रो. जेवोन्स के तालिकाबद्ध

मान को अपनाना चाहिए। यदि आप सोने का प्रयोग नहीं करना चाहते

और सोने की किफायत करना चाहते हैं तो फिर मेरा निवेदन यह है कि

आपको उन दोनों में से एक या दूसरे को अपना लेना चाहिए।

6074 मुझे इस बात का यकीन नहीं है कि मुझे प्रोफेसर फिशर के मानक की

बहुत घनिष्ट जानकारी है। परंतु क्या ये दोनों एक ही प्रकार के प्रस्ताव

हैं?- प्रो. फिशर के क्षतिपूरक मानक को छोड़कर ये बिल्कुल समान

हैं-वे वास्तव में, मुझे क्या कहना चाहिए, मेरा मतलब है एक पदक के

दोनों छोर कहिए। फिशर, उदाहरणार्थ, किसी इन्डेक्स नम्बर के अनुसार

सोने की यूनिट में धातु को बदल देगा और प्रो. जेवोन्स किसी इंडेक्स

नम्बर के अनुसार अपेक्षाकृत अधिक या कम यूनिटों को देने की अनुमति

प्रदान करेगा। परंतु मेरा विचार है कि वे दोनों बहुत अधिक जटिल हैं।

मेरा व्यक्तिगत विश्वास यह है वास्तव में सब व्यावहारिक कार्यों के लिए

स्वर्णमान पर्याप्त होता है।

6075 व्यावहारिक रूप में क्या संभव है पुनः इस बात पर विचार करते समय,

आपकी राय यह है कि भारत की मुद्रा यूनिट के मूल्य का निर्धारण सोने

की कुछ मात्रा के लिहाज से होना चाहिए?- नहीं, मेरा निवेदन यह है

कि भारत को मुद्रा के रूप में सोना रखना चाहिए। सोना केवल प्रेषण की

एक यूनिट के रूप में कार्य न करे।

6076 मैं उससे आगे चलता हूं और आपसे एक दूसरा प्रश्न पूछता हूं। मैं अब

आपके द्वारा प्रस्तुत सुझाव व दृष्टिकोण पर विचार करता हूं। मैं समझता

हूं आपका वह दृष्टिकोण आपके ज्ञापन के पैराग्राफ 4, उप-पैरा (2) में

भलीभांति व्यक्त किया गया है उसमें आपने यह कहा है कि ‘‘सोने के

अवमूल्यन के कारण मूल्यों में लगातार वृद्धि से समूचे विश्व को हानि

उठानी पड़ रही है। इसलिए, सोने के मूल्य वृद्धि कराने वाला कोई भी

कार्य उत्तम होगा। और, यदि सोने के मूल्य में वृद्धि करनी है तो सोने को