भारतीय मुद्रा और वित्त के संबंध में 15 दिसम्बर, 1925 को शाही आयोग के समक्ष साक्ष्य - Page 349

334 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

मुद्रा के रूप में और अधिक प्रयोग किया जाना चाहिए।’’ यदि मैं उस राय

की सही शक्ति को समझता हूं तो वह यह है कि स्वर्ण विनिमय मान का

झुकाव सोने के प्रयोग में किफायत करने की ओर है और विवेकपूर्ण तथा

वांछनीय क्या है, वह यह नहीं कि सोने के प्रयोग में किफायत की जाए

और इसलिए यह कि क्या स्वर्ण विनिमय मान खराब चीज है?-हां।

6077 और क्या वह उस दृष्टिकोण पर आधारित है जिसे आप विश्व में सोने

की मांग तथा आपूर्ति के बीच भावी संबंध मानते हैं? -हां।

6078 आपका यह मत है कि सोने की भावी आपूर्ति, उसकी मांग के परिप्रेक्ष्य

में बढ़ने की संभावना है? - नहीं, बढ़ेगी नहीं, यह अधिक रहेगी, क्योंकि

दूसरे लोग सोने का प्रयोग नहीं कर रहे हैं, वे कागज का प्रयोग कर रहे

हैं, वे सोने का प्रयोग करने की स्थिति में नहीं है, इसलिए, यदि चाहे सोने

का प्रयोग न भी किया जाए, पर फिर भी इसकी मात्रा अधिक रहेगी।

6079 सर्वप्रथम, उसके संबंध में एक प्रारंभिक प्रश्न है। क्या इसमें आप यहां

भारत का हित सोच रहे हैं या आप उस सेवा के बारे में सोच रहे हैं, जो

भारत शेष संसार को प्रदान कर सकता है? मेरे ध्यान में दोनों बाते हैं।

6080 आपका विचार है कि उस काम को करके भारत एक ही समय में अपना

निजी हित साधन करेगा और साथ ही साथ शेष संसार का भी हित करेगा।

क्या आप इस असामान्य मत से सहमत हैं कि स्वर्ण मुद्रा एक खर्चीली

प्रणाली है? -हां, यह है।

6081 इसलिए इसमें होने वाले खर्च से भारत को क्या हानि होने की संभावना है

सबसे पहले, हमें उस पर विचार करना है। उस खर्च की तुलना में भारत

को होने वाले लाभ क्या हैं? -वह यह है कि आपको अपेक्षाकृत अधिक

स्थिर मानक प्राप्त होता है जिसे प्रोफेसर केनन में धोखेबाजी से रहित और

संतुष्टि से पूर्ण कहते हैं।

6082 अब जहां तक इसके भविष्य का संबंध है, इस विवादित विषय की शक्ति

क्या समस्त संसार में सोने की आपूर्ति के संबंध में आपके पूर्वानुमान के

पूर्ण होने पर निर्भर होगी?- हां।

6083 क्या आप इस बात से सहमत होंगे कि मान लिया जाए इसके विपरीत

विश्व की सोने की आपूर्ति में सापेक्ष ह्रास व कमी हो जाए तो क्या उस

समय, सोने के प्रयोग में किफायत करना, अन्य देशों की तरह भारत के

लिए भी लाभदायक होगा? - मेरा उत्तर यह है कि हमें एक अनिश्चित

संकुचन से डरना नहीं चाहिए। हमारे पास मुद्रा को बढ़ाने की विधियां

हमेशा रही हैं। अनिश्चित प्रसार जो हमेशा संभव होता है, हमें उसके प्रति