1. दोहरे मानक से रजत मानक तक - Page 35

20 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इस विषय में बहुत अच्छा प्रकाश डालती है। यह कहता है-

‘‘बंगाल बिहार और उड़ीसा के मुख्य जिलों में से प्रत्येक जिले में अपनी ही

प्रकार की चांदी की मुद्रा है.....जो उन जिलों में जहां यह क्रमशः परिचालित

होती है, सभी लेन-देन के लिए मूल्यांकन हेतु समान है।

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‘‘यदि रैयत (किसान) को किसी विशेष प्रकार के ‘रुपये में अपना लगान अदा करना

है तो अलबत्ता उन्हें निर्माताओं को अपने अनाज कच्चा माल देकर रुपये प्राप्त करने

थे जबकि निर्माता रैयत के इसी प्रकार के सिद्धांतों से प्रवृत्त होकर उन व्यापारियों के

रुपये की वही किस्में लेते थे जो कपड़े अथवा सामान खरीदने आते थे।’

‘‘तदनुसार सभी प्रकार के पुराने रुपये शीघ्र कुछ विशेष जिलों की मुद्रा बन गए

और उसके परिणामस्वरूप प्रत्येक रुपये का मूल्य उस जिले में बढ़ा दिया गया

जिसमें उसका प्रचालन था क्योंकि सभी लेन-देन में उसकी मांग की गई थी।

एक अन्य परिणाम के रूप में जिले में लाया गया प्रत्येक प्रकार का रुपया उस

रुपये के मूल्य से कहीं अलग होने के कारण अस्वीकार कर दिया जाता था

जिसके आधार पर निवासी अपनी सम्पत्ति का मूल्यांकन करने के लिए अभ्यस्त

हो गए थे अथवा यदि इसे प्राप्त किया जाना था तो इस पर वही बट्टा लगाया

गया जो उस जिले में प्रचलित रुपये के लिए सर्राफ के घर पर विनिमय हेतु

भुगतान किया जाता था अथवा किसी अन्य व्यक्ति को भुगतान के एवज में उसे

देने के लिए बट्टा दिया जाता था।

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‘‘एक जिले में चालू सिक्के की इस अस्वीकृति से जब दूसरे जिले में भुगतान करना

पड़ता तो देश के विभिन्न भागों में सौदागर व्यापारी, मालिक और भूमि जोतने वाले

किसान एक-दूसरे के साथ अपने व्यावसायिक लेन-देन में विनिमय द्वारा समान

हानि तथा उन्हें सभी प्रकार की उन असुविधाओं का सामना करना पड़ता था जो

आवश्यक रूप से पैदा हो जाती थी। यह स्थिति अलग और स्वतंत्र सरकारों के

अंतर्गत कई जिलों की थी और उनमें से प्रत्येक जिले का अलग सिक्का था।’’

यह एक स्थिति थी जहां व्यापार वस्तुओं की अदला-बदली तक सीमित रह गया था। चाहे कोई व्यक्ति विनिमय के आम माध्यम की अनुपस्थिति द्वारा अदला-बदली को प्रमुख समझे अथवा विनिमय के माध्यम की बहुलता की उपस्थिति समझे, चाहे जो भी हो यह स्पष्ट है कि ‘दोहरे संयोग’ के अभाव को व्यापार में लगे लोगों ने महसूस कर लिया होगा। कोई व्यक्ति यह भी विचार कर सकता है कि यह ऐसा