भारतीय मुद्रा और वित्त पर शाही आयोग के समक्ष साक्ष्य
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लिए सोने के प्रयोग में किफायत करना व्यर्थ है, मैं मूल्यों को बढ़ने की अपेक्षा मूल्यों की गिरावट के पक्ष में हूं और यदि उन मूल्यों में गिरावट होती है और वह गिरावट में तेजी से होती है तो मुझे प्रसन्नता होती है। मेरा विचार है कि मूल्यों में वृद्धि न होकर यदि उनमें गिरावट होती है तो वह राष्ट्र के लिए अच्छा तथा हितकर होता है। इसलिए वास्तव में ये अनुमान मुझे अपना प्रस्ताव रखने से नहीं रोकते।
6090 फिर भी, आपके विचारों का आधार कुछ अलग है? विचारों का जितना महत्व है मैं उन्हीं विचारों को उतना ही मानता हूं - मैं उनका खंडन करने की स्थिति में नहीं हूं क्योंकि मैंने कभी कोई अनुमान नहीं बनाया। परंतु जैसे-तैसे मेरा यह विश्वास है कि सोने की वर्तमान राशि पहले ही इतनी अधिक है और उस मुद्रा को किसी भी मुद्रा को, प्रयोग करने की संसार के देशों की क्षमता इतनी कम है कि सोने की आपूर्ति, दीर्घकाल तक, अधिक बने रहने की संभावना है, और मेरे विचार में, ऐसी स्थिति में, मूल्यों में गिरावट आने का कोई अवसर नहीं है।
6091 फिर, आगे एक और प्रश्न है। मैं प्रस्तावना के रूप में कहूंगा आप यहां ‘विनिमय मान का विषय’ पर चर्चा कर रहे हैं? - हां।
6092 पैरा-5 में आपने कहा है, ‘‘स्वर्णमान निधि एक रूप में, विलक्षण है, अर्थात यह परिसम्पत्ति, अर्थात निधि तथा दायित्व, अर्थात रुपये का सह-संबंध
खतरनाक रूप में इस तथ्य के कारण है कि रुपये की मुद्रा में वृद्धि के बिना निधि में वृद्धि नहीं हो सकती।’’ आप कृपया इसे थोड़ा-सा और स्पष्ट कीजिए। आपको यह दिखाने के लिए मेरे विचार से कौन-से ऐसे बिन्दु हैं जिनको विस्तार चाहिए, मैं एक आलोचक द्वारा किए जा सकने वाले ये संभावित प्रश्न प्रस्तुत करूंगा। क्या कोई आलोचक यह नहीं कह सकता, कि आप यह कहते हैं कि रुपये की मुद्रा में वृद्धि हुए बिना, निधि में वृद्धि नहीं हो सकती। और यह आलोचक कह सकता है कि यह क्यों होना चाहिए? वह यह कहेगा कि यदि रुपये की मुद्रा में वृद्धि निधि में वृद्धि के बिना नहीं हो सकती तो क्या वह सबसे मनचाही स्थिति नहीं होगी? क्या आपने मेरी बात समझ ली है?- इसे मैं इस प्रकार समझाउंगाः उदाहरणार्थ, बैंक निर्गम होते हैं और बैंक की निधियां होती हैं, यदि आप बैंक की निधियों की बैंक के निर्गमों के साथ तुलना करें और भारत सरकार की मुद्रा तथा स्वर्णमान निधि की तुलना रुपया निर्गम से करें तो आप देखेंगे कि जब बैंक निर्गम सीमित होते हैं तो निधि में वृद्धि होती है और इसकी विलोम स्थिति भी होती है। परंतु उदाहरणार्थ यहां आप अपनी निधि को कम किए बिना भी रुपये की मुद्रा को कम नहीं कर सकते।