भारतीय मुद्रा और वित्त पर शाही आयोग के समक्ष साक्ष्य
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को 1893 में की थी।
6095 तात्कालिक बात की ओर ध्यान देने के लिए इन स्थितियों के अधीन निधि
का कार्य स्थिरता को बनाए रखना है। क्या ऐसा नहीं है? -मेरा विचार
है कि वहां एक निधि नहीं होनी चाहिए। मुद्रा कुछ-कुछ एक ऐसी वस्तु
के समान है, जो अपने मूल्य को केवल आपूर्ति तथा मांग के नियम के
कारण बनाए रखती है।
6096 क्या आप इस प्रस्ताव को अस्वीकार करते हैं कि निधि का कार्य स्थिरता
को बनाए रखना है?
- हां, मैं करता हूं। मैं मेरे विचार से इसमें निधि का कोई कार्य नहीं है।
सच बात तो यह है कि जब मुद्रा सीमित होती है तो निधि अपने आपको
बनाए रखती है। वह मुद्रा का रख-रखाव नहीं करती।
6097 आइए, अब हम मुद्रा के सुधार के लिए आपके व्यावहारिक प्रस्ताव पर
विचार करें। आपका कहना हैः- ‘‘भारतीय मुद्रा के सुधार के लिए मेरी
योजना की आवश्यकताएं निम्नलिखित हैंः- (1) टकसाल जिस प्रकार
जनता के लिए बंद हैं उन्हें उसी प्रकार से सरकार के लिए पूर्णतया बंद
करके रुपये का सिक्का बनाना बंद कर दिया जाए। (2) स्वर्ण के एक
उपयुक्त सिक्के का निर्माण करने के लिए सोने की टकसाल खोली जाए।
(3) सोने के सिक्के तथा रुपये के बीच एक अनुपात निर्धारित कीजिए।
(4) रुपया स्वर्ण में परिवर्तनीय और सोना रुपये में परिवर्तनीय नहीं होना
चाहिए, बल्कि दोनों, विधि द्वारा निर्धारित अनुपात पर असीमिमत वैद्य मुद्रा
के रूप में वितरित व प्रचलित हों।’’ एक व्यावहारिक मनुष्य के लिए प्रश्न
उत्पन्न होता है, कि सोने के सिक्के तथा रुपये के बीच आप अनुपात किस
प्रकार बनाकर रखेंगे, और देश के व्यापार के संतुलन के अनुसार गिरावट
की तुलना में बट्टा काटने या अधिमूल्य देने के लिए किसी व्यक्ति को
आप किस प्रकार रोकेंगे? अच्छा है, रुपया अपने मूल्य को इस कारण
बनाकर रखेगा कि उसकी मात्रा सीमित होगी, रुपये का और कोई निर्गम
जारी नहीं किया जाएगा।
6098 उसे अधिमूल्य की ओर जाने से रोकने के लिए क्या है? -वह अधिमूल्य
की ओर एकदम नहीं जा सकता क्योंकि उसके पास सोने में अनुकल्प है।
रुपये सोने में परिवर्तनीय नहीं हैं। रुपया बट्टे की ओर नहीं जा सकता
क्योंकि उसकी मात्रा सीमित है। रुपये के और सिक्के नहीं बनाने हैं। रुपया
अधिमूल्य की ओर नहीं जा सकता क्योंकि मुद्रा के रूप में कार्य करने
वाले सोने के सिक्के का विकल्प है।
6099 फिर आपका यह कहना हैः- ‘‘किन्तु यहां ठीक यह मौका है कि रुपये
की मुद्रा की वर्तमान मात्रा इतनी विशाल है कि जब व्यापार में मंदी होती