भारतीय मुद्रा और वित्त के संबंध में 15 दिसम्बर, 1925 को शाही आयोग के समक्ष साक्ष्य - Page 356

भारतीय मुद्रा और वित्त पर शाही आयोग के समक्ष साक्ष्य

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6103 फिर आप यह कहते हैं कि बहुत बड़ी संख्या में ठेके हाल की तारीख में

किए गए हैं?- हां मेरी सूचना वास्तव में, प्रो. केनन द्वारा ‘‘स्टेटिस्टिकल

जरनल’’ में प्रकाशित उसके एक लेख में दी गई एक छोटी टिप्पणी पर

आधारित है।

6104 क्या कोई ऐसे आंकड़े उपलब्ध हैं जिससे हमें ठेकों की सही संख्या का

सही अनुपात मिल सके?- मेरे विचार से यह एक अनुमान है यदि किसी

काम को समझा जाये यह एक सहज बुद्धि का प्रश्न है।

6105 फिर आप यह कहते हैं कि यह कहा जा सकता है कि कुल संविदात्मक

दायित्वों का गुरूत्व केन्द्र हमेशा वर्तमान के निकट होता है। ‘‘उन परिसरों

के कारण आप निम्नलिखित निष्कर्ष पर पहुंचते हैं- कि इन दो तथ्यों के

आधार पर सबसे उत्तम समाधान 1 शि. 4 पैंस तथा 1 शि. 6 पैंस के

बीच एक औसत निकालना होगा और यह कहना होगा कि यह 1 शि. 4

पैंस की अपेक्षा 1 शि. 6 पैंस के अपेक्षाकृत अधिक निकट है। मुझे यह

यकीन नहीं है कि मैं उसे बिल्कुल समझता हूं। आपके तर्क के रुख के

कारण मुझे यह कल्पना करनी पड़ रही है कि आप अंततोगत्वा 1 शि. 6

पैंस की दर के समर्थक निकलेंगे?- मैं कहता हूं कि यह 1 शि. 6 पैंस

के अपेक्षाकृत अधिक निकट तथा 1 शि. 4 पैंस से कुछ दूर हो सकता

है।

6106 आप किस अनुपात का सुझाव देंगे?- यह कहना मुश्किल है, वास्तव में

मेरा विचार यह है कि 1 शि. 6 पैंस ठीक उतना ही अच्छा होगा। यह

किसी पर बहुत तकलीफ नहीं डालेगा।

6107 फिर, जहां तक रुपये के बढ़ते तथा गिरते अनुपात का प्रश्न है, आपकी

राय संक्षेप में पैरा 9 में दी गई है। आपका कहना है, ‘‘अब यदि यह

महसूस किया जाता है कि निम्न विनिमय का अर्थ, आंतरिक मूल्य का

अधिक होना है तो यह बात एकदम स्पष्ट हो जाएगी कि यह लाभ देश

में एक वर्ग को दूसरे वर्ग की कीमत पर होने वाला लाभ नहीं हैं।’’ कौन

सा वर्ग लाभान्वित होता है और कौन सा हानि उठाता है? व्यापारी वर्ग

लाभान्वित होता है। श्रमिक वर्ग को लाभ नहीं होता। उत्पादन के समस्त

कारकों के मूल्य में परिवर्तन नहीं होता। मजदूरी में मूल्यों की तरह तेजी

से परिवर्तन नहीं होता और इन वर्गों को हानि उठानी पड़ती है।

6108 मुद्रा की मौसमी मांगों को पूरा करने के लिए उसे लचीलापन प्रदान करने के

लिए मुद्रा की व्यवस्था करने के विषय में जहां तक महत्वपूर्ण प्रावधानों का

संबंध है क्या आपके पास उनके लिए सैद्धांतिक या व्यावहारिक दृष्टिकोण