भारतीय मुद्रा और वित्त के संबंध में 15 दिसम्बर, 1925 को शाही आयोग के समक्ष साक्ष्य - Page 358

भारतीय मुद्रा और वित्त पर शाही आयोग के समक्ष साक्ष्य

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द्वारा, कागज की मुद्रा की निधि का भी उन्मूलन क्यों नहीं करते, क्योंकि

कागज का मूल्य उसकी सीमाओं पर निर्भर होता है?- बिल्कुल ठीक।

6116 क्या आप उसका उन्मूलन करेंगे? - नहीं, इस कारण क्योंकि हम कागज

की मुद्रा को जारी करने पर कोई निश्चित सीमा नहीं लगा रहे हैं। जिस

योजना के अंतर्गत मैं स्वर्णमान का उन्मूलन करने के लिए कहता हूं,

उसमें मैं रुपये के जारी करने पर एक निश्चित सीमा रख रहा हूं, कागज

की मुद्रा के मामले में, हमने सरकार को अपना विवेक प्रयोग करने की

अनुमति दी है।

6117 क्या आपके विचार से वह संभव है?- मैं आपको इसका कारण बताऊंगा।

क्योंकि सीमित आय तथा उस प्रकार की चीजों से जनसंख्या की वृद्धि

के साथ-साथ रुपये के प्रयोग की अपेक्षाकृत अधिक गुंजाइश है? क्या

आप यह कहते हैं कि यह हमेशा-हमेशा के लिए है? हम सोने के सिक्के

बना रहे होंगे और उस समय तक रुपये के नहीं बनाएंगे जब तक यह

संभावना न हो जाए कि प्रचलन में सोने की मात्रा रुपये की मात्रा से दस

गुणा होगी। क्या वह देश के लिए सुविधाजनक होगा?- मेरे विचार से वह

होगा। मैं तो बल्कि यह कहूंगा कि हम सोने का प्रयोग करने के बजाए

सोने द्वारा समर्थित नोटों का प्रयोग करते हैं। मेरा अभिप्राय यह नहीं है कि

हाथों-हाथ सोने का प्रयोग करना चाहिए।

6118 (सर नारकोट वारेन) आपके ज्ञापन के पैरा 8 के बाद वाले भाग से क्या

मैं क्या समझूं कि आपका सुझाव 1 शि. 4 पैंस की अपेक्षा 1 शि. 6 पैंस

की दर की ओर अधिक है।

-मैं 1 शि. 6 पैंस के पक्ष में प्रायुक्ति को स्वीकार करता हूं।

6119 (सर एलेक्जेंडर मुरे) डॉ. अम्बेडकर यहां एक बात है, जिसका उल्लेख

आपने अध्यक्ष द्वारा प्रस्तुत कुछ प्रश्नों के उत्तर में किया है। ऐसा प्रतीत

होता है कि आपका सुझाव यह है कि भारत सरकार किसी प्रकार रुपये

के सिक्के बनाने के लिए केवल इसलिए तैयार हो गई थी ताकि वह रुपये

के बुलियन मूल्य तथा सांकेतिक मूल्य के बीच लाभ कमा सके। मैं यह

जानना चाहता हूं कि आप वास्तव में किस चीज की ओर संकेत कर रहे

हैं?

- मैं इस चीज का उल्लेख कर रहा हूं, यह एक थोड़ी ऐतिहासिक बात

है। उदाहरणार्थ, जब भारत सरकार ने फाउलर समिति द्वारा सुझाए गए