भारतीय मुद्रा और वित्त पर शाही आयोग के समक्ष साक्ष्य
347
6131 इसमें अंतर केवल यह है कि आप सर एडवर्ड लॉ पर आरोप लगा रहे हैं
कि उसने एक आरक्षित निधि का निर्माण करने के लिए रुपये के सिक्के
बनाए। मैं यह कहता हूं कि उसने ऐसा नहीं किया कि उसने वास्तविक
विज्ञप्ति में यह कहा कि यहां उस समय स्वर्णनिधि है, मेरे विचार से वह
70 लाख है। यदि ऐसा है तो हमारे मत में अंतर है।
6132 इससे किसी को क्या कल्पनीय लाभ हो सकता है मुझे नहीं दिखाई देता
फिर क्यों कोई व्यर्थ में निधि को बढ़ाएगा।
- बिल्कुल ठीक और लोगों को एक बड़ा भ्रम है कि एक आरक्षित निधि की
आवश्यकता है और एक आरक्षित निधि के बिना मुद्रा कार्य नहीं कर सकती।
मेरे विचार से यह एक सामान्य अंधविश्वास है। इसमें ऐसी ही बात है।
6133 (एलेक्जेंडर मुरे) मैं आपको संदर्भ बताऊंगा आपकी पुस्तक ‘‘रुपये की
समस्या (दि प्रॉब्लम ऑफ दि रूपी) के पृष्ठ 276 से 278 तक?-हां जब
सुधारों को लाया गया तब वेस्टलैंड वहां था, पृष्ठ 276।
6135 यह कौन सी तारीख थी?- वह सुधारों को शुरू करने के बाद 1898-99
का बजट भाषण है।
6136 यह 1994-95 में था-नहीं_ डॉकिन्स का उल्लेख अगले पृष्ठ पर है। मेरा
संदर्भ पृष्ठ 276 पर 1898-99 के लिए वित्तीय विवरण से है। फिर सर
एडवर्ड लॉ से संबंधित पैराग्राफ पृष्ठ 278 पर है।
6137 मैं आपकी बात में सुधार करता हूं क्या इसके लिए आप मुझे क्षमा करेंगे?
आपने कहा कि आपका 11888-89 के बजट भाषण में है। आपने जो
संदर्भ दिया है वह वास्तव में 1894-95 के भाषण से है। वह 1899 में
वित्त मंत्री भी था।
6138 उसने 1894-95 में इसे अस्वीकार कर दिया?- मेरा अभिप्राय यह है कि
हर्शल समिति तथा फाउलर समिति के बीच कोई अंतर नहीं था और यदि
आप यह सोचते हैं कि मैंने इस सज्जन के विरुद्ध कोई बहुत घटिया आरोप
लगाया है तो इसके लिए मुझे खेद है।
6139 (सर एलेक्जेंडर मुरे)- मैं केवल आपके बयान के पैराग्राफ 5 में आपने
जो कहा है, उसका उद्धरण दे रहा हूं। मैं यह कहता हूं कि उससे किसी
भी व्यक्ति के उस जाल में फंसने का खतरा है।
6140 (अध्यक्ष) और आप यह कहते हैं कि अपनी पुस्तक में आपने इन प्रसिद्ध
राज नायकों का समर्थन किया है?- हां।
6141 (सर पुरूषोत्तमदास ठाकुरदास) पैरा 8 में विश्व के विभिन्न देशों के संबंध
में आपने कहा है कि ‘‘वे युद्ध से पूर्व की सममूल्यता पर लौटने के लिए