348 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
लालायित हैं।’’ और आप कहते हैं कि ऐसा सार्वभौमिक प्रतीत होता है।
इसके बाद आप यह कहते हैं, ‘‘लेकिन भारत तथा अन्य देशों के बीच
केवल यह अंतर है। अन्य देशों को अभी युद्ध से पूर्व की सममूल्यता पर
पहुंचना है। इसके विपरीत, भारत वास्तव में युद्ध के पूर्व की सममूल्यता
से भी आगे पहुंच गया है।’’ जिन अन्य देशों का आप उल्लेख करते हैं,
उनकी मुद्रा का युद्ध के दौरान अत्यधिक अवमूल्यन हुआ था।µबिल्कुल।
6142 क्या सम्पन्न देश नहीं?- मेरे विचार से वे देश भी जो अपनी पुरानी
सममूल्यता के बहुत निकट हैं, परन्तु उस पर वापस जाने में कठिनाई
महसूस करते हैं।
6143 उदाहरणार्थ, आपके दिमाग में कौन से देश हैं?- मैं जिनेवा सम्मेलन के
विषय में बात कर रहा हूं, जिनका मेरे दिमाग पर कोई असर नहीं है, परंतु
मैं इटली जैसे देश के विषय में सोचता हूं। फ्रांस एक समय युद्ध से पूर्व
की सममूल्यता के निकट था।
6144 अब संभवतः फ्रांस की स्थिति सबसे खराब है, अतएव आप भारत तथा
उन अन्य देशों के बीच अंतर के विषय में कह रहे हैं। जिन देशों की मुद्रा युद्ध
के दौरान गंभीर रूप से विस्थापित हो गई थी और जो उसे अब तक ठीक नहीं
कर सके?- मेरा तर्क यह है कि यदि हम चाहेंएक दूरी तक वापस जाने की
स्थिति में थे, परंतु यह बात बुद्धिमतापूर्ण या उचित नहीं होगी कि हम उस
पर वापस जाने की स्थिति में होते हुए भी उस पर पुनः वापस जाएं।
6145 मैं उस पर बाद में आऊंगा, मैं आपको केवल यह बताने का प्रयास कर
रहा हूं कि यह कहा जा सकता है कि भारत तथा अन्य देशों के बीच
आप जो तुलना कर रहे हैं वह जहां तक मुद्रा की समस्याओं तथा स्थितियों
का संबंध है उसकी दृष्टि से टिक नहीं सकती। जहां तक ऐसा हो सकने
का संबंध है, मेरा अभिप्राय इन दोनों के बीच अंतर से है कि चाहे वे
(अवमूल्यन मुद्रा वाले देश) चाहते भी हों फिर भी वे वापस नहीं जा
सके। क्या ऐसा करना चाहिए और क्या हम वैसा कर सकते हैं? बहुत
अच्छा आपने इस बात को इतने स्पष्ट रूप से रख दिया है कि मैं भी इस
तरह नहीं रख सकता था।
6146 इसलिए यदि आप भारत की तुलना उन देशों के साथ करते हैं जो युद्ध से
पूर्व की मूल्य साम्यता पर वापस पहुंच गए तो क्या आपको उन देशों का
पता चलेगा जो युद्ध से पूर्व की स्थिति पर वापस गए हैं?-हां, उदाहरणार्थ
इंग्लैंड, परंतु इंग्लैंड में भी उस समय एक प्रबल राय थी कि उन्हें वापस
उस स्थिति पर नहीं जाना चाहिए।
6147 मेरा अभिप्राय है कि इस प्रबल राय के बावजूद आप यह कहते हैं कि
उन्होंने स्वर्ण युद्ध से पूर्व की मूल्य साम्यता से सामंजस्य स्थापित कर लिया