भारतीय मुद्रा और वित्त पर शाही आयोग के समक्ष साक्ष्य
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है और अब आपको उस स्थिति पर जाने के विषय में अधिक शिकायत
सुनाई नहीं देती? मैं नहीं बता सकता।
6148 मै देखता हूं। आप जानते नहीं जब तक यह न कहा जा सके कि जो वापस
गए उन्होंने गलती की, तब तक भारत में उनके विरुद्ध कोई बात विशेष
रूप से आपत्तिजनक नहीं हो सकती जो युद्ध से पूर्व की साम्यावस्था पर
वापस जाना चाहते हैं- नहीं, मैं वह बात नहीं कहता। मैं वास्तव में, यह
प्रश्न उठा रहा हूं कि क्या यह उचित है?
6149 अब इसके औचित्य के संबंध में लेख से नीचे में आप कहते है कि यह
दृष्टिकोण गलत है, आप कहते हैं कि ये दोनों दृष्टिकोण भ्रामक हैं। आप
कहते हैं कि युद्ध से पूर्व की मूल्य साम्यता की पुनःस्थापना युद्ध से पूर्व
के मूल्य स्तर की पुनःस्थापना नहीं है। अब क्या आपका यह विचार है
कि विनिमय का प्रयोग, मूल्य स्तर को प्राप्त करने के लिए किया जाना
चाहिए?- नहीं।
6150 तब मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि यह कोई बहुत भ्रामक नहीं है?- नहीं मैं
यह कहता हूं यद्यपि आप हमेशा यह नहीं कह सकते कि विनिमय तथा
मूल्य स्तर साथ-साथ चलते हैं, फिर भी....
6151 क्षमा कीजिए, मेरा प्रश्न था, क्या आप यह सुझाव देते हैं, कि क्या विनिमय
का प्रयोग मूल्य स्तर का समायोजन करने के लिए एक लीवर के रूप में
किया जाना चाहिए?- नहीं, मैं वह बात नहीं कहता।
6152 इसलिए, उस दृष्टि से अनुपात का परितर्वन मूल्यों के समायोजन के लिए
एक लीवर के रूप में, उपयुक्त या वांछनीय नहीं था?
- हां यह उपयुक्त नहीं था।
6153 किसी भी देश ने यह नहीं किया है, जब तक आप यह न दिखा सकें कि
यह एक अपवाद के रूप में, भारत के मामले में, विशेष रूप से उचित
था?- परंतु यह सब देशों में हुआ है।
6154 कौन से देश?-समस्त देश।
6155 क्या मैं अपने प्रश्न को और स्पष्ट करूं?
- मेरे विचार से आपने प्रश्न को बहुत स्पष्ट रूप में नहीं रखा।
6156 मैं कभी-कभी अपने प्रश्नों को अधिक स्पष्ट रूप में नहीं रख पाता, मैं
स्वीकार करता हूं। कौन से ऐसे देश हैं जो युद्ध से पूर्व की मूल्य साम्यता
को प्राप्त कर सके हैं और जो अपने आंतरिक मूल्यों के स्तर का समायोजन
करने के लिए स्वेच्छापूर्वक पिछली स्थिति में गए हैं? - नहीं- वास्तव
में, उन्होंने वैसा नहीं किया।
6157 अतएव, भ्रम कहां हैं?- भ्रम इस अर्थ में है, ऐसा करने में कुछ लोग