भारतीय मुद्रा और वित्त पर शाही आयोग के समक्ष साक्ष्य
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हम निश्चय ही 1 शि. 4 पैंस स्वर्ण तक नहीं पहुंच सकते। इसलिए मेरे
मस्तिष्क में पूरा प्रश्न यह है कि आज हमारे यहां जो कीमतें हैं क्या हम
उन्हें बढ़ाएं, ताकि हम 1 शि. 4 पैंस पर वापस जा सकें? श्रमिक समाज
का एक सदस्य होने के नाते, मैं यह महसूस करता हूं कि कीमतों का
गिरना बेहतर होता है। इस विषय में मेरा दृष्टिकोण यही है।
6165 मैं इसे दूसरे तरीके से लेता हूं। आप कहते हैं, जैसा कि आपने प्रस्तुत
किया, कि श्रमिक वर्ग समाज का सदस्य होने के नाते, इसका अर्थ यह
हुआ कि श्रमिक वर्ग की दृष्टि से यह अवांछनीय है?- हां, और मैं इससे
भी आगे जा सकता हूं और यह कहता हूं कि राष्ट्रीय दृष्टिकोण से भी
बढ़ती हुई कीमतों की अपेक्षा गिरती हुई कीमतें बेहतर होती हैं।
6166 अब मेरा ख्याल है आपने दिए जा रहे उन तर्कों को सुन लिया होगा कि
एक उच्च विनिमय एक ऐसा विनिमय जो उस बिन्दु से उच्चतर स्थिति
में लाया गया है जिस पर वह 15 या 20 वर्ष की अवधि तक रहा है,
उत्पादक के हित में अवांछनीय होता है। इस संबंध में आप क्या कहेंगे?-
इस सबका अर्थ लाभ में कमी होना है। मैं तो इसमें एक अंतर करना
चाहता हूं- मुझे पता नहीं, लोग इसे कितना पसंद करेंगे- उद्योग की मंदी
तथा लाभों की मंदी के बीच अंतर है। मेरा विचार है कि इस अंतर की
बात प्रोफेसर मार्शल द्वारा स्वर्ण तथा रजत आयोग के समक्ष अपनी गवाही
के दौरान कही गई थी। लाभ की मंदी हो सकती है, अर्थात उद्यम वाले
वर्ग को हो सकता है वह सब न मिले जो उन्हें तब मिलता जब कीमतों
में वृद्धि होती, परंतु यह आवश्यक नहीं कि ऐसा हो।
6167 मुझे क्षमा कीजिए, क्या मैं उत्पादक से उसका संबंध नहीं बता सकता? यदि
आप महसूस न करें तो हम बाद में निवेश पर आएंगे। परंतु उत्पादक के
संबंध में आपका क्या विचार है? उसके मामले में, जितना अधिक विनिमय
होगा, उतनी ही कम संख्या उसको उपलब्ध रुपयों की होगी? इसका उसके
लिए बिल्कुल कोई महत्व नहीं है, क्योंकि वह इसे खर्च कर देता है। उसके
उत्पादन की लागत में भी गिरावट आती है, अतएव, उसमें कोई अंतर नहीं
पड़ता। यदि उसे 15 रुपये मिले और यदि 15 रुपये से उसने किसी वस्तु की
कुछ मात्रा खरीदी, और यदि अबसे पांच वर्ष बाद उसके पास दस रुपये हों
और उन दस रुपयों में वह उतनी ही मात्रा खरीदे जितनी पहले पंद्रह रुपये
में खरीदी गई थी। परिवर्तन केवल गणकों का परिवर्तन है।
6168 समायोजन कब पूरा होता है? परंतु क्या तब तक अव्यवस्था होती है? -
हां।