भारतीय मुद्रा और वित्त के संबंध में 15 दिसम्बर, 1925 को शाही आयोग के समक्ष साक्ष्य - Page 367

352 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

6169 अब हम वर्तमान समय में इस पर दृष्टिपात करें। आप सोचते हैं कि औसत

भारतीय किसान मुश्किल से ही किसी मजदूर को लगाता है और वह अपने

हाथों से ही खेती करता है?- मैं समझता हूं कि किसान कुछ मामलों में

मजदूर को लगाता है।

6170 साधारण प्रक्रिया में, पूर्ण होने वाले समायोजन के लिए, आप यह आशा

करेंगे कि जो मजदूरी वह अपने मजदूरों को देता है वह भी कम होगी?

- हां, मेरा अभिप्राय है कि यदि वह उतनी ही राशि में लाभ प्राप्त करना

चाहता है, तो मैं कहूंगा हां।

6171 बहुत अच्छा यदि किसान के मजदूर की मजदूरी में कमी नहीं हुई है तो

क्या आप यह स्वीकार करेंगे कि उस सीमा तक, किसान को कम लाभ

हुआ है? - कम लाभ, हां मैं उसे स्वीकार करता हूं। 6172 और उन मामलों में जहां पर किसान केवल अपना गुजारा ही कर सकता

है, वहां पर वह हानि उठाता है?- नहीं, उसे लाभ नहीं होता, परंतु उसे

हानि भी नहीं होती। लाभ कुछ और चीज होती है वह अतिरिक्त होता

है।

6173 जहां पर एक किसान या एक जिले में कृषकों का एक वर्ग अपना गुजारा

पर्याप्त रूप में कर लेता है, उनको उतनी ही हानि होगी जितनी उस अनुपात

में मजदूरी कम नहीं हुई थी।- मुझे मालूम नहीं, आप लाभ की परिभाषा

कैसे देते हैं। मैं लाभ की परिभाषा अतिरिक्त लाभ के रूप में देता हूं।

6174 क्या उत्पादन के समस्त खर्चों का भुगतान करने के बाद?-हां।

6175 यदि सन 1921 में एक किसान अपना गुजारा भर ही करता था और जहां

तक उसके उत्पादन का संबंध है 1924 में जब विनिमय, 1 शि. 6 पैं. पर

स्थिर किया गया, और उसकी मजदूरों की मजदूरी में भी कमी नहीं हुई

तो क्या उसे निश्चित रूप में हानि होगी?- उसे अपने लाभ के कुछ भाग

की हानि होगी।

6176 क्या उसे बहुत कम बचत होगी?- मैं ‘‘लाभ’’ शब्द पर जोर दूंगा। 6177 क्या उसे कम लाभ होगा?- हां लाभ में मंदी होगी।

6178 उस सीमा तक वास्तव में उत्पादक हानि उठाने वाला होगा?- यदि आप

यह सोचते हैं कि उस लाभ पर उसका वैध अधिकार है तब, आपका यह

कहना ठीक होगा कि उसे हानि है, परंतु यदि वह केवल एक अंतरीय

लाभ था तब वह हानि नहीं।

6179 1 शि. 5 पैं. के रूप में यह केवल अंतरीय लाभ था?-हां।