भारतीय मुद्रा और वित्त के संबंध में 15 दिसम्बर, 1925 को शाही आयोग के समक्ष साक्ष्य - Page 369

354 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

है?- मैं नहीं समझता कि इस समय अधिक विद्यमान होंगे।

6191 क्या आप सोचते हैं कि किसानों द्वारा बोने वालों को देय इन सब ऋणों

का भुगतान एक निश्चित अवधि के अंदर किया जाता है?- मेरी व्यक्तिगत

राय यह है कि कोई भी वाणिज्यिक संविदा पांच वर्ष से अधिक तक नहीं

बढ़ता और उनका अनुपात बहुत ही कम होता है। इसके संबंध में कोई

सांख्यिकीय सूचना उपलब्ध नहीं है। प्रोफेसर फिशर ने उस संबंध में अपनी

पुस्तक में कुछ गणना की है। वह उसमें लिखता है कि ब्याज की दर

मूल्यों से अलग होती है। जिससे ब्याज की दर तथा मूल्यों की वृद्धि तथा

गिरावट के साथ कुछ संबंध होता है। फिर वह इस निष्कर्ष पर पहुंचता

है कि अधिकांश संविदाएं वाणिज्यिक दृष्टि से बहुत ही नवीन है।

6192 आपका अभिप्राय भारत के संबंध में है?- मेरा अभिप्राय सामान्य रूप से

है। मैं भारत के विषय में विशेष नहीं जानता, भारत में कुछ विलक्षण बात

हो सकती है। परंतु मुझे मालूम नहीं कि ऐसा क्यों होना चाहिए।

6193 क्या आप यह सोचते हैं कि भारत में स्थिति अलग हो सकती है?- मुझे

तब तक ऐसा नहीं सोचना चाहिए, जब तक उसके संबंध में ऐसा कोई

प्रमाण न मिले कि वह ऐसा था।

6194 आप सोचते हैं कि भारत में समस्याएं वैसी ही हैं जैसी पश्चिमी देशों में

हैं? मुझे ऐसा कोई कारण दिखाई नहीं देता कि वे वैसी क्यों नहीं हैं।

6195 यदि उन्हें दूसरे भिन्न रूप में स्वीकार कर लिया जाएगा तो क्या उससे

आपको आश्चर्य होगा?-उससे मुझे आश्चर्य होगा।

6196 मूल्य स्तरों के समायोजन के विषय में क्या आप यह सोचते हैं कि समायोजन

अब पूर्ण होने वाला है यह 1 शि. 4 पैंस से 1 शि. 6 पैंस की विनिमय

दर में गड़बड़ होने के कारण है?- उसमें कुछ गड़बड़ होगी। यदि हम 1

शि. 4 पैंस से 1 शि. 6 पैंस तक वापस गए तो वह मजदूरी पाने वालों

के लिए हानिकारक होगा।

6197 निम्न से उच्च दर 1 शि. 4 पैंस से 1 शि. 6 पैंस तक की दर में

गड़बड़......? -यह श्रमिक वर्ग के लिए अनुकूल रही है।

6198 क्या वह समायोजन पूर्ण है, या उसका अब भी कोई कुसमायोजन है? -

मैं नहीं कह सकता, यह मामला सांख्यिकीय अन्वेषण का है जो मैंने नहीं

किया है? परंतु मैं समझता हूं कि विनिमय दीर्घकाल से 1 शि. 6 पैंस पर

स्थिर रहा है।