356 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
में उस समय तक वृद्धि नहीं हो सकती जब तक रुपये को सिक्के और
अधिक न हो। गत तीन वर्षों में निवेश पर ब्याज द्वारा एक-तिहाई वृद्धि
कैसे हुई है?
6205 फिर यदि उस आरक्षित निधि पर ब्याज को उसमें जोड़ते चले जाएं तो
आप उस निधि को एक उपयोगी कार्य के लिए बढ़ा रहे हैं और यह इसमेंं
इन तरीकों को अपनाए बिना कर रहे हैं जिनकी आप प्रबल रूप में निंदा
करते हैं।- हां निःसंदेह।
6206 उस निधि की उपयोगिता के संबंध में केवल एक और बात। इस बात
की आपको जानकारी होगी कि 1908 में विश्व की मंदी की अवधि के
दौरान, यदि वह उसी निधि के लिए नहीं होता तो हम अपनी बाह्य मूल्य
साम्यता को बनाकर कभी नहीं रख सकते थे। क्या आप इसे स्वीकार करते
हैं?-हां।
6207 धन्यवाद?- यद्यपि, निःसंदेह किसी चीज की जांच की गई है जिसको मुझे
अपवादस्वरूप समझना चाहिए- ऐसा कहने में मेरा अभिप्राय यह है कि
मैं निवेश द्वारा स्वर्णमान निधि को बढ़ाने के पक्ष में हूं। यदि एक आरक्षित
निधि का निवेश किया जाता है, तो वह कोई आरक्षित निधि बिल्कुल नहीं
है।
6208 (सर रेजिनाल्ड मांट) मैं समझता हूं आपकी मुख्य मांग आंतरिक मूल्यों
की स्थिरता है?-बिल्कुल।
6209 और आप यह मानते हैं कि उस स्थिरता को फिर स्वर्ण मूल्य के साथ
जोड़ा जाएगा, क्या नहीं जोड़ा जाएगा। वे स्वर्ण मूल्यों के साथ अलग-अलग
होंगी?-हां।
6210 फिर आंतरिक मूल्यों को, स्वर्ण मूल्यों के साथ जोड़ा जाएगा, क्या नहीं
जोड़ा जाएगा?- वे स्वर्ण मूल्य के साथ-साथ अलग-अलग होंगे? हां। 6211 अब स्वर्ण मुद्रा रहित, एक स्वर्ण विनिमय मान की कुछ लोगों द्वारा उसी
उद्देश्य को ध्यान में रखकर सिफारिश की गई है, परंतु मैं समझता हूं
कि आप यह मानते हैं कि इससे उस उद्देय की प्राप्ति नहीं होगी।- मेरा
विचार है कि जहां तक भारत का संबंध है, उसने इसे प्राप्त नहीं किया
है।