358 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
8 में आप कहते, ‘‘इसमें संदेह नहीं कि वर्तमान संविदाओं का समय
अलग-अलग है, परंतु उनमें से अधिकांश बहुत हाल ही की तारीख हैं
और संभवतः एक वर्ष से अधिक की नहीं हैं। जिससे यह कहा जा
सकता है कि संपूर्ण संविदात्मक दायित्वों का गुरूत्व केन्द्र हमेशा वर्तमान
के निकट होता है।’’ जब आप इस मामले का उल्लेख कर रहे हैं तो
मैं समझता हूं कि आप किसी निश्चित सांख्यिकी के बिना ही बता रहे
हैं?- हां, मैं केवल यह कहता हूं कि प्रोफेसर फिशर द्वारा की गई एक
गणना रही है।
6219 आपने इसका उल्लेख एक प्रकार से सामान्यीकरण के रूप में किया है?-हां
मैंने कहा है कि मेरे पास कोई निश्चित सूचना नहीं है।
6220 जब आप यह कहते हैं कि संपूर्ण संविदात्मक दायित्व का गुरूत्व केन्द्र
वर्तमान के निकट है, तो यह कोई बहुत निश्चित अवधि नहीं है। क्या
वह गुरूत्व केन्द्र, बारह महीने की परिधि के अंतर्गत नहीं आएगा?- हां,
उसके लगभग ही होगा। क्योंकि मैंने एक वर्ष का कहा है।
6221 इसलिए, यदि कोई अनुपात बारह महीने पहले था, तो आपके तर्क के
अनुसार, हमारा उसे 1 शि. 6 पैंस के रूप में लेना उचित होगा?-बिल्कुल
ठीक।
6222 इसलिए आपका भी उसे मानना उतना ही औचित्य होगा?- हां। 6223 फिर जब आप इस मामले पर चर्चा कर रहे हैं और जब आपने 1 शि.
6 पैंस अनुपात के पक्ष में अपनी इच्छा प्रकट की तो मैं समझता हूं कि
आपकी अपनी राय प्रोफेसर फिशर की उक्ति पर आधारित है?-हां। 6224 अब प्रोफेसर फिशर की उक्ति हमारे सामने है, उसमें प्रयुक्त शब्द इस
प्रकार हैं- ‘‘रुपये के ठीक मान की समस्या, पीछे के बजाय आगे की
ओर देखती है, उसे इस समय चालू व्यापार से प्रारंभ करना चाहिए, युद्ध
व्यापार से प्रारंभ करना चाहिए युद्ध से पूर्व के काल्पनिक अंकित मूल्य
से नहीं?’’
-बिल्कुल।
6225 क्या आप यह नहीं समझते कि जब प्रोफेसर फिशर ने वह बात कही थी
तो उसके समक्ष केवल यूरोप की स्थिति थी?- हां परंतु वह बात प्रायः
किसी भी देश पर लागू होगी। यह एक सामान्य बात है।