भारतीय मुद्रा और वित्त पर शाही आयोग के समक्ष साक्ष्य
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6226 मेरा प्रश्न यह है कि जब उसने वह बात कही थी तब क्या उसकी दृष्टि
में उस समय केवल यूरोप की स्थिति नहीं थी? मैं नहीं कह सकता।
6227 (अध्यक्ष) साक्षी ने उत्तर दिया है कि उसके विचार से वह हर परिस्थिति
में लागू होगा?
- हां, यह एक सामान्य बात है।
6228 (सर माणोकजी दादाभाई) क्या इन अभिव्यक्त शब्दों द्वारा वह निष्कर्ष
उचित ठहरता है?- मेरे विचार से यह उचित है।
6228ए आपके विचार से यह है? ‘‘वह आगे कहता है, वह केवल युद्ध का ही
उल्लेख नहीं करता, वह कहता है, ‘‘कोई मूल रजत पाउंड को पुनःस्थापित
करने या ग्रीस तथा रोम के मुद्रा-मानों पर लौटने के विषय में भी बात
कर सकता है।’’
6229 अब आप भली-भांति जानते हैं कि 1 शि. 6 पैंस का यह अनुपात भारत
में केवल पिछले 16 महीने से लगातार रहा है। यदि, भारतीय परिस्थितियों
में इस अवधि को 16 महीने मानते हैं तो उस समय आप क्या कहेंगे जब
आप युद्ध से पूर्व के किसी काल्पनिक सममूल्य के विषय में सोचते हैं?
क्या आप यह सोचते हैं कि भारत में 16 महीने की अवधि से निष्कर्ष पर
पहुंचने में कोई बड़ा भारी अंतर पड़ेगा? वह युद्ध से पूर्व के काल्पनिक
सममूल्य का उल्लेख कर रहा है, इसमें अपेक्षाकृत अधिक लम्बा समय
लगता है? - नहीं, नहीं। वह केवल पीछे 1914 का उल्लेख कर रहा है,
उस सममूल्यता का उल्लेख कर रहा है जो 1914 में विद्यमान थी । मैं
कहता हूं, यदि सूचना के अनुसार 1 शि. 6 पैंस 16 महीने तक अस्तित्व
में रहा है, तो मैं कहता हूं कि इसकी पुष्टि होनी चाहिए।
6230 हां। किन्तु, यदि उससे पहले, कुछ वर्षों के संक्षिप्त अंतराल के साथ,
यह समान रूप में, 20 वर्ष तक 1 शि. 4 पैंस पर बनी रही। आप उन
सब विचारों को उठाकर किनारे रख देंगे?- हां, क्योंकि जो संविदाएं 20
वर्ष पहले की गई थीं, उनमें से अब कोई भी अस्तित्व में नहीं है। और
इसलिए हमें उसके विषय में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
6231 यह आपका तर्क है? और आप, देश की कृषि तथा उद्योगों दोनों पर पड़ने
वाले इसके आर्थिक प्रभाव को भी एक किनारे रख देंगे?- मैं कहता हूं,
वे बहुत अच्छे होंगे। अनुपात को 1 शि. 6 पैंस पर लाने के लाभ में कुछ
मंदी आ सकती है, परंतु उद्योग में मंदी नहीं होगी।