भारतीय मुद्रा और वित्त के संबंध में 15 दिसम्बर, 1925 को शाही आयोग के समक्ष साक्ष्य - Page 375

360 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

6232 हां। इसलिए आप उन कारकों को अधिक महत्व नहीं देते। आप सोचते

हैं कि कुल मिलाकर यह देश के हित में होगा?- हां।

6233 मैं आपके समक्ष एक दूसरा, थोड़ा सा काल्पनिक प्रश्न रखूंगा। हमें अपनी

रिपोर्ट को लिखने में छह महीने का समय लगेगा। अगले 6 महीने में यदि

अनुपात 1 शि. 8 पैंस हो जाता है, तो मेरा विचार है कि आपके मतानुसार

यदि उसे अपनी गणना का आधार बनाएं तो क्या आपका ऐसा करना उचित

होगा?

- मैं पुनः यह कहूंगा, कि आपको एक औसत निकालना चाहिए।

6234 1 शि. 8 पैंस तथा 1 शि. 6 पैंस के बीच या 1 शि. 4 पैंस के बीच?

- 1 शि. 8 पैंस तथा 1 शि. 6 पैंस के बीच।

6235 और आप समझते हैं कि वह एक स्वस्थ वित्तीय नीति होगी?- मैं नहीं

जानता। आपको किसी प्रकार का औसत निकालना होगा। आप अलग-अलग

संविदा के साथ न्याय नहीं कर सकते हैं। उदाहरणार्थ, यदि आप अमेरिका

के स्वतंत्रता युद्ध का उदाहरण लें और उस समय जो आर्थिक उतार-चढ़ाव

आया उसको देखें तो उस स्थिति में अमेरीकावासी जो कुछ कर सके वह

निःसंदेह इसी प्रकार का कार्य था।- औसत निकालना तथा उसके आधार

पर समस्त संविदाओं को भंग करना। वे अलग-अलग संविदा के साथ

न्याय नहीं कर सके। यह असंभव है।

6236 (सर हैनरी स्ट्राकोश) डॉ. अम्बेडकर, मैं आपके कुछ बयानों का जिक्र

करना चाहता हूं जो आपने स्वर्ण विनिमय मान की शुरूआत करने की

अवांछनीयता के संबंध में दिए थे। अपनी गवाही के दौरान एक समय

आपने यह कहा कि विनिमय में परिवर्तनीयता से मुद्रा का निर्गम सीमित

नहीं होगा और इसलिए उससे आंतरिक मूल्यों में स्थिरता नहीं आएगी।

यह आपने एक आपत्ति की थी। और फिर एक और बिन्दु पर आपने यह

कहा था कि स्वर्ण विनिमय मान एक वांछनीय मान नहीं है क्योंकि इसके

अंतर्गत मूल्य, एक पूर्ण स्वर्ण मान के अंतर्गत मूल्यों की अपेक्षा कम स्थिर

होंगे?- हां।

6237 अब आप आर्थिक मामलों के विद्यार्थी हैं और इसमें संदेह नहीं कि आपने

जिनेवा सम्मेलन की कार्यवाही को समझा होगा?- हां, यह मैंने उस समय

किया, जब मैं लंदन में था। कदाचित, हाल में नहीं किया है। परंतु मैं यह

जानता हूं कि स्वर्ण विनिमय मान प्रस्तावित किया गया था।