भारतीय मुद्रा और वित्त पर शाही आयोग के समक्ष साक्ष्य
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6247 अब मैं यह जानना चाहता हूं कि आंतरिक कार्यों के लिए सांकेतिक मुद्रा
की क्रयशक्ति की स्थिरता में वृद्धि क्यों होनी चाहिए? -क्योंकि सिद्धांत
यह है कि कोई भी वस्तु तथा इसमें मुद्रा भी शामिल, अपने आपको इस
तथ्य द्वारा बनाकर रखती है कि उसकी मात्रा, आपूर्ति सीमित होती है। यह
राजनीतिक अर्थनीति की प्रथम प्रारंभिक प्रतिज्ञप्ति है, कि कोई भी वस्तु
अपने आपको इस तथ्य के कारण बनाकर रखती है कि उसकी आपूर्ति
सीमित होती है। यदि प्रदत्त वस्तु सीमित नहीं है तो उसका अवमूल्यन
होना अवश्यंभावी है।
6248 फिर क्या आप यह सोचते हैं कि स्वर्णमुद्रा वाले आपके स्वर्णमान में
परिसंचरण में सोने के सिक्के के अलावा और कोई चीज नहीं होगी, -नहीं।
मै कहता हूं कि रुपया परिसंचरण में होगा।
6249 और कोई बैंक नोट नहीं ?- हां, बैंक नोट होंगे। क्यों नहीं होंगे?
6250 तब, मैं यह नहीं समझता कि आप दूसरे मामले की अपेक्षा एक मामले में
आंतरिक निर्गम को अधिक प्रभावी रूप में किस प्रकार सीमित कर रहे
हैं?-क्योंकि मैं यह कह रहा हूं कि टकसाल को बंद कर दिया जाएगा।
6251 बैंक नोटों के निर्गम के विषय में क्या होगा?- वे आवृत्त हैं। जारी किया
गया आवृत्त नोट, मुद्रा में वृद्धि नहीं है। मान लिया आप सोने की कुछ
मात्रा बैंक में जमा करते हैं और आप उसे आवृत्त करने के लिए एक
निश्चित मात्रा में मुद्रा जारी करते हैं तो वह मुद्रा में वृद्धि नहीं है।
6252 तो आप ऐसे नोट रखना चाहते हैं जो 100 प्रतिशत स्वर्ण से आवृत्त हों?-
मैं शत-प्रतिशत सोना नहीं कहता।
6253 तब आप इसे सीमित कैसे करेंगे?- मेरा अभिप्राय यह है कि परिवर्तनीयता
सीमाकरण की एक विधि है। मेरे पास कागज की मुद्रा होगी जो पूर्णतया
परिवर्तनीय होती है और न केवल बाह्य व्यापार के लिए परिवर्तनीय होगी
जिससे कि यह अपने मूल्य का रख-रखाव कर सकेगी यह सीमा के अंदर
होगा। इसलिए वह इस तथ्य के कारण अपने मूल्य को बनाए रखेगी।
कागजी मुद्रा परिवर्तनीय होने के कारण अपना मूल्य बनाए रखेगी।
6254 और मुद्रा की मौसमी आवश्यकता का प्रबंध आप कैसे करेंगे?- हां, मैं
कहता हूं कि आप मुद्रा के न्यासीय भाग का प्रसार कर सकते हैं ताकि
मौसमी मांग के दौरान कागज के प्रति जारी करने की अनुमति मिल
जाए।