भारतीय मुद्रा की वर्तमान समस्या
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काम जो कर सकते हैं, वह इन दो चरम सीमाओं के बीच गतिशील रहना है। अब इस अवधि के दौरान, हमारे रुपये के विनिमय मूल्य की दो चरम सीमाएं। 1 शि. 4 पैं. तथा 1 शि. 6 पैं. हैं। इससे कुछ लोगों को आश्चर्य हो सकता है। क्योंकि यह बात सुविदित है कि एक समय रुपया 3 शिलिंग तक पहुंच गया था और हमारा संविधि रुपये को 2 शिलिंग सोने के बराबर मानता है। परंतु मेरी राय में, हमें उसकी पूरी उपेक्षा करनी चाहिए। एकदम यह कहा जा सकता है कि भारतीय मुद्रा की छानबीन करने के लिए समय-समय पर नियुक्त विभिन्न समितियों द्वारा प्रकाशित रिपोर्टों में से कोई भी रिपोर्ट इतनी मूर्खतापूर्ण नहीं थी, जितनी कि बेबिंग्टन स्मिथ समिति की रिपोर्ट थी, जिसकी सिफारिश पर यह संविधि बनाई गई थी। यह इतनी अनभिज्ञ समिति थी कि वह उस समस्या को नहीं समझ सकी जिसकी छानबीन करने के लिए इसे नियुक्त किया गया था, इसके फलस्वरूप वह सब बातों को अस्त-व्यस्त कर गई। जैसा कि सुविदित है, इस समिति ने यह रिपोर्ट की थी कि रुपये का मूल्य बढ़ाकर 2 शि. सोना कर दिया जाए। वह इस बात को कहने के बराबर था कि रुपये के मूल्य में वृद्धि हो गई है। दूसरे शब्दों में यह कहना था कि भारत में मूल्य गिर गए हैं। तथ्य क्या थे? निम्नलिखित तालिका से समूचा चित्र सुविधापूर्वक सामने आ जाता हैःµ
तारीख भारत में स्वर्ण छड़ भारत में चांदी भारत में मूल्य के
का मूल्य (बम्बई) का मूल्य लिए इंडैक्स नं.
180 ग्राम का प्रति (बम्बई) 1913=100
तोला प्रति 100 तोला
रु. आ. रु.आ.
1914 24-10 65-11
1915 24-14 61-2 112 1916 27-2 78-10 125 1917 27-11 94-10 142 1918 (जुलाई) 34-0 117-2 178 (अगस्त) 30-0 - (सितम्बर) 32-4 - 1919 (मार्च) 32-3 113-0 200
तालिका से यह स्पष्ट है कि रुपये के मूल्य में वृद्धि होने के बजाय रुपये के मूल्य में अत्यधिक ”ास हो गया था। चांदी के मूल्य में निःसंदेह कल्पनातीत वृद्धि हो गई थी। और समिति ने बिना किसी अधिक परेशानी के यह निष्कर्ष निकाल लिया