1. दोहरे मानक से रजत मानक तक - Page 39

24 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अनुरूप बनाई गई थी । इसके अलावा 180 ग्रेन की इकाई का भार इस दृष्टिकोण से न केवल उपयुक्त था अपितु अपने पक्ष में भार की अंग्रेजी इकाई के साथ भारतीय इकाई के भार को आत्मसात् करने की सुविधा को बढ़ाने के पक्ष में भी रहा। ख्1,

मुद्रा की मुख्य इकाई के भार को 180 ग्रेन ट्राय तक निर्धारित ख्2, करने के पक्ष में ये कारण थे तथापि 165 ग्रेन शुद्ध भार की परियोजना अपने आप में उचित

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XXXV
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XII,1805 dk


XIV,1803
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176-4

179-66
173
175
164-740
166-477

175-927
166-135
168-875
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179
32-40
190-804
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164-740
42-55
189-40
  1. वही, पैरा 28 अंग्रेजी और भारतीय की पद्धतियां एक-दूसरे के समान रहीं, इसका उल्लेख इस प्रकार

हैः-

भारतीय अंग्रेजी

8 रती =1 माशा = 15 ट्राय ग्रेन

12 माशा=1 तोला (अथवा सिक्का) = 180 ट्राय ग्रेन

80 तोला= 1 सेर = 2 ½ ट्राय पौंड

40 सेर=1 मन =100 ट्राय पौंड

  1. रुपये के भार की इकाई के रूप में 180 ग्रेन ट्राय की परियोजना पर केप्टिन जर्विस के मतभेद के बारे

में ध्यान आकर्षित किया जा सकता है। उनका सुविस्तृत ग्रंथ देखिए जिसका नाम है- दी एक्स्पीडियन्सी

एंड फेसेलिटी ऑफ एस्टेबिलिशिंग द मेट्रोलाजिकल एंड मॉनेटेरी सिस्टम्स थ्रूआउट इंडिया ऑन ए

साइंटिफिक एंड परमानेंट बेसिस ग्रडिऐड ऑन एन एनेलिटकल रिव्यू ऑफ द बेटस, मेजर्स एंड काइंस

ऑफ इंडिया भारत के भार, मापन और सिक्कों के विश्लेषणात्मक समीक्षा पर आधारित वैज्ञानिक तथा

स्थायी आधार पर भारत भर में माप पद्धति और मुद्रा पद्धति के स्थापित किए जाने की तात्कालिता तथा

सुविधा).......बम्बई, 1836 पृष्ठ 49-64