भारतीय मुद्रा की वर्तमान समस्या- 16th April 1925 - Page 391

376 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सौभाग्यवश, हम अपने मूल्य स्तर की स्थिरता के लिए तो दूसरे देशों पर निर्भर नहीं है, वास्तव में हमने अपने विनिमय के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना चाहिए। विनिमय की स्थिरता यदि हम चाहें भी तो भी हम नहीं कर सकते। परंतु हमारे मूल्यों के स्थिरीकरण को हम यदि चाहें तो कर सकते हैं। यदि हम अपने मूल्यों तथा अपने विनिमय को स्थिर कर सकें तो बेहतर होगा। परंतु क्योंकि अन्य देश अपने मूल्य स्तर को स्थिर नहीं कर सकते अतः हम ऐसे उपाय क्यों न करें जो हमें अपने यहां स्थिर मूल्य प्रदान करें, यह वास्तव में मुद्रा के माध्यम से बाहर निकालने के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। मेरी राय में हमें रुपये को, 1 शि. 6 पैं. पाउंड पर सोने के साथ जोड़कर अपने मूल्य को तुरंत स्थिर करना चाहिए। यूरोपीय देश शीघ्र ही यह महसूस करेंगे कि सोने के साथ युद्ध-पूर्व सममूल्यता की स्थिति पर वापस पहुंचना पागलपन है और उन्हें यह जानकारी होगी कि मुद्रा के मामले में किसी निश्चित समय पर वास्तविकता प्राकृतिक तथा सामान्य है। यदि वे हमारी आशा से पहले इस बात को जान जाएंगे तो हमें यह पता चलेगा कि वे वर्तमान स्तर पर सोने के रूप में, अपनी मुद्रा को स्थिर कर रहे हैं। उस मामले में, सोना, मूल्य के एक अंतर्राष्ट्रीय मान के रूप में, पुनः कार्य करना आरंभ कर देगा और हमारे पास एक स्थिर विनिमय होगा। परंतु उससे पहले, यदि हमारे पास सोने के रूप में स्थिर कीमतें हैं तो उससे निश्चय ही हमारी कोई हानि नहीं हो सकती है।

इस विवाद के दौरान एक नए दृष्टिकोण का उदय हुआ जिसके अनुसार हमें उस समय तक अपनी मुद्रा की पुनःव्यवस्था के मामले में कुछ करने की आवश्यकता नहीं है जब तक हम पहले वे उपाय नहीं कर लें जो नियंत्रित मुद्रा की वर्तमान प्रणाली के स्थान पर स्वचालित नई मुद्रा प्रणाली को लाए। इस दृष्टिकोण के साथ मेरी पूर्ण सहानुभूति है, इसलिए नहीं कि मुझे यह यकीन है कि एक स्वचालित मुद्रा, एक नियंत्रित मुद्रा की अपेक्षा हमेशा अधिक स्थिर होगी, बल्कि इसलिए है कि इससे हमें उस प्रश्न की याद आ जाती है, कि स्थिरता को प्राप्त करने के बाद हम उसे किस प्रकार बनाए रख सकते हैं? यह प्रश्न स्थिरता को प्राप्त करने की अपेक्षा अधिक विचारणीय है। परंतु इस बात का सुझाव देना कि अपने मूल्य स्तर को स्थिर करने के लिए हमें उस समय तक कुछ नहीं करना चाहिए जब तक हम नियंत्रित प्रणाली तथा स्वचालित प्रणाली के बीच निर्णय करें पृथ्वी पर नरक बनाना है क्योंकि स्वर्ग दूत इस पर स्वर्ग बनाने की स्वीकृति प्रदान नहीं करते। इसी कारण मैंने सोचा था कि यह एक बिल्कुल अलग मामला है। कुछ लोगों का उसके संबंध में यह कहना है कि वह किसी अन्य समय पर लाभदायक हो सकता। लेकिन इस समय नहीं।