समीक्षा मुद्रा तथा विनिमय - Page 397

382 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

बेहतर न होता, कि लेखक एक सामान्य भूमिका अदा करता और निर्गम की निश्चित परिवर्तनीय रुपये या सीमा सहित अपरिवर्तनीय रुपये की सिफारिश करता।

इस पुस्तक में वे भाषण दिए गए हैं जो लेखक ने एलिंगस्टन कॉलेज, बम्बई तथा सेंट्रल हिन्दू कालेज, बनारस में, अपने विद्यार्थियों के समक्ष प्रोफेसर के रूप में दिए थे और यह पुस्तक दो भागों में विभक्त है। भाग एक अधिकांशतः सूचनात्मक है, इसके संबंध में लेखक कहता है कि यह भाग उन उम्मीदवारों के लिए है जो अर्थशास्त्र में स्नातक डिग्री के लिए तैयारी कर रहे हैं, ‘‘भाग 2 मुख्यतः आलोचनात्मक है और यह मुख्यतः ‘‘ऑनर्स डिग्री के लिए तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के लिए है।’’ अर्थशास्त्र में परीक्षक के रूप में मुझे हमेशा यह आश्चर्य हुआ कि पॅालिटिकल इकोनोमी में पास कोर्स के अधिकांश विद्यार्थियों के उत्तर बच्चों द्वारा शिशुओं की कहानियों को सुनाने के पाठ की तरह और ऑनर्स कोर्स के उम्मीदवारों के उत्तर उधार टिप्पणियों के विकृत रूपान्तरों की तरह क्यों पढ़े जाते हैं। जैसा कि लेखक सहज रूप में सुझाव देता है इससे स्पष्ट है कि यह सब इस कारण है कि दो वर्गों के विद्यार्थियों को दो भिन्न प्रकार का भोजन प्रदान किया जाता है परंतु इनमें से कोई सा भी उनको प्रचुर मात्रा में या व्यावहारिक रूप में उपलब्ध नहीं कराया जाता है।