समीक्षा कराधान जांच समिति की रिपोर्ट 1926 - Page 398

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समीक्षा

कराधान जांच समिति की रिपोर्ट 1926 *

कराधान जांच समिति, 1926 की रिपोर्टµ1

रिपोर्ट देने के लिए आयोगों का गठन और जांच के लिए समितियों का निर्माण कर देना, ब्रिटिश शासन प्रणाली की एक अजीब विशेषता है। अंग्रेजी संसदीय कार्यवाही का यह एक मूलभूत सिद्धांत है कि सामाजिक एवं आर्थिक विधि निर्माण के मामले में वह कभी भी अंधेरे में छलांग नहीं लगाती। समितियां तथा आयोग, संसद के अधिनियम की आवश्यक प्रारंभिक तैयारी है। इस कार्य में सुप्रसिद्ध कहावत ज्ञान ही शक्ति है, का अनुसरण किया जाता है। यह देखकर प्रसन्नता होती है कि अंग्रेजी संसदीय प्रक्रिया के इस सिद्धांत का अनुसरण भारत में भी किया गया है और हमारे जो राजनीतिज्ञ प्रायः आयोगों तथा समितियों की नियुक्ति का विरोध करते हैं, उनके विषय में यह नहीं कहा जा सकता कि वे देश के सर्वोत्तम हित में कार्य कर रहे हैं।

तथापि, कराधान जांच समिति के मामले में सरकार ही इसे रोकने का प्रयास कर रही थी और जब उसने जांच कराई तो वह जांच उस प्रकार की नहीं थी जिसकी मांग विधान सभा द्वारा की गई थी। एसेम्बली यह चाहती थी कि लोगों की कर देने योग्य क्षमता का पता लगाया जाए। परन्तु सरकार इसका सामना इस डर के कारण नहीं करना चाहती थी कि ऐसी जांच से यह जाहिर हो सकता है कि लोगों के ऊपर कराधान का भार उनकी कर योग्य क्षमता के साथ मेल नहीं खाता था। परन्तु जब जनमत ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी जांच कराई जाए तो उसने एक प्रकार के प्रपंच से जांच को दो भागों में विभक्त कर दिया। (1) कराधान जांच समिति और (2) आर्थिक जांच समिति। इसका परिणाम यह हुआ कि इनमें प्रत्येक समिति की रिपोर्ट की उपयोगिता ही समाप्त हो गई। कराधान जांच समिति के लिए विचारणीय विषयों में उसे यह निर्देश दिया गया था कि वह (1) उस तरीके

* दि सर्वेंट ऑफ इंडिया खंड 9 सं. 13, 29 अप्रैल, 1926 पृष्ठ 163-64