कराधान जांच समिति की रिपोर्ट 385
ऐसा इस कारण हुआ कि वह कर के विवरण देने के प्रश्न पर विचार करना भूल गई जोकि अंततः उसकी जांच का सबसे महत्त्वपूर्ण भाग था।
मूल्य समस्या का समाधान करने में इस समिति के असफल रहने का कारण मुख्यतः समिति के कार्मिकों को बताया जाता है कि अधिकांश कार्मिक इस कार्य में विशेषज्ञ नहीं थे। यदि यह अफवाह सच है, तो कहा जाता है कि उनमें से अधि कांश लोगों ने, इस समिति में नामित होने के बाद, पंजाब वित्त व्यवस्था की ए.बी.सी. सीखना आरंभ किया। इसमें आश्चर्य नहीं कि ऐसी संस्था से निकलने वाली रिपोर्ट, इस विषय के विद्यार्थियों के लिए निरर्थक सिद्ध होती है। तथापि, रिपोर्ट के पक्ष में एक बात कही जा सकती हे। यह एक ऐसी रिपोर्ट है जो सहजबुद्धि से परिपूर्ण व सफाईपूर्वक व्यवस्थित की गई है। यदि वह विद्यार्थियों को संतुष्ट नहीं कर सकती, तो यह निश्चय ही उसके बौद्धिक कार्यों के लिए एक आधार के रूप में कार्य अवश्य करेगी। मुझे आशा है कि समिति के कुछ प्रस्तावों की जांच-पड़ताल, परवर्ती लेखों में की जाएगी। इस समय मैं, रिपोर्ट पर सामान्य रूप में अपने विचार इस विवरण में प्रस्तुत कर अपनी बात समाप्त करता हूं।