1. दोहरे मानक से रजत मानक तक - Page 43

28 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

प्रयास किया कि रुपये और पैगोडा के बीच साथ-साथ परिचालन किया जाए परंतु बाजार भाव अनुपात 400ः100 के वैध अनुपात को स्थापित करने के बजाय उस समय महाप्रान्त में सोने के आयात की वृद्धि के कारण यह आशा बंधी कि बाजार का अनुपात इतना बढ़ जाएगा कि वह 1749 में स्थापित वैध अनुपात के बराबर होगा। इस प्रकार से उत्पन्न नवोदित उत्साह में यह निर्णय किया गया कि 1790 के अनुमान के अनुरूप इस अनुपात को 365ः100 निर्धारित किया गया। वांछित परिणाम से स्थिति का भिन्न होना आवश्यक था क्योंकि यह पैगोडा का मूल्यांकन कम करना था परंतु इस भूल के सुधार की अपेक्षा सरकार ने 1779 में 350ः100 के अनुपात में वृद्धि कर स्थिति को और बिगाड़ दिया जिसका कुप्रभाव यह हुआ कि पैगोडा पूर्णतया परिचालन से बाहर हो गया और इस प्रकार द्विधातुवाद का अंतिम प्रयास बुरी तरह असफल रहा।

ऐसा प्रतीत होता है बंबई की सरकार द्विधातुवाद की यांत्रिकी में अपेक्षाकृत अधिक ज्ञान प्राप्त कर चुकी थी यद्यपि इससे पद्धति की व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने में कोई सहायता नहीं मिली। पहली बार जब महाप्रांतऽ में द्विधातुवाद का कार्य प्रारंभ किया गया था तो मोहर और रुपए का अनुपात 15.70ः1 था परंतु इस अनुपात पर मोहर की दर अधिक पायी गई और तदनुसार अगस्त, 1774 में टकसाल के अधिकारी को यह निदेश दिया गया कि वेनिश के मुद्रा शुद्धता से सोने की मोहरों के सिक्के ढाले जाएं और उनका भार चांदी के रुपये के भार के समान हो। इस परिवर्तन से वैध अनुपात 14.83.1 पर जो लगभग बिल्कुल ठीक वैसा नही था जैसा कि तत्कालीन बाजार भाव की अनुपात 15ः1 प्रचलित था और कोई भी अनहोनी घटना नहीं घटी अतः द्विधातुवाद को अन्य दोनों महाप्रांतों की तुलना में बम्बई में अधिक सफलता मिल जानी चाहिए। परंतु ऐसा नहीं होना था, क्योंकि सूरत के नवाब की बेईमानी के कारण स्थिति बिल्कुल ही बदल गई क्योंकि उन्होंने बम्बई के रुपये के समान भार तथा शुद्धता वाले रुपये का 10, 12 और यहां तक कि 15 प्रतिशत भाग में खोट मिला दिया। इस खोट मिलावट के काम का अहितकर प्रभाव बम्बई महाप्रांत के द्वि धातु पद्धति पर नहीं पड़ता यदि यह तथ्य न होता कि नवाब (सूरत के नवाब) के रुपयों के बारे में यह समझौता किया गया था कि कम्पनी के क्षेत्र में बम्बई के रुपयों के समान ही उनका परिचालन किया जाएगा। उनके वैध सिक्के मानने के फलस्वरूप सूरत के रुपये एक बार खोट मिलावट के बाद बम्बई के रुपयों को परिचालन से

ऽ अनुलग्नक सहित बम्बई महाप्रांत में हिस्ट्री ऑफ कौईनेज पर डॉक्टर स्कॉट की रिपोर्ट, पब्लिक

कन्सलटेशन्स (बम्बई तारीख 27 जनवरी, 1801)।