30 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अधिकरण द्वारा प्रस्तावित मुद्रा की इकाइयों में मुद्रा की वर्तमान इकाइयों को बदल देने का कार्य सर्वप्रथम मद्रास में सम्पन्न किया गया। 7 जनवरी, 1818 को सरकार ने एक घोषणाऽ जारी की जिसके द्वारा मुद्रा की पुरानी इकाइयों आर्कोट रुपया और स्टार पैगोडा के स्थान पर नई इकाइयां स्थापित की गई अर्थात् सोने का रुपया और चांदी का रुपया परिचालित किया गया जिनमें से प्रत्येक का भार 180 ग्रेन ट्राय था और जिसमें 165 ग्रेन शुद्ध धातु थी। 6 अक्तूबर, 1824 की घोषणा [†] द्वारा 6 वर्ष बाद बंबई द्वारा मद्रास का अनुसरण किया गया। इसके अनुसार यह घोषित किया गया कि मद्रास मानक का सोने व चांदी का रुपया सारे महाप्रांत में एक मात्र वैध मुद्रा होगी। बंगाल की सरकार को कहीं बड़ी समस्या का समाधान करना था। इसके पास चांदी की मुद्रा की तीन अलग-अलग मुख्य इकाइयां थीं जिन्हें अधिकरण द्वारा प्रस्तावित मानक के अनुसार परिवर्तित किया जाना था। इसने समाप्त करने और परिवर्तन करने की पद्धति द्वारा पुनर्गठन का कार्य प्रारंभ किया। 1819 में इसने बनारस के रुपये से सिक्के ढालने का काम बंद दिया [‡] और उसके स्थान पर फरुखाबाद का रुपया परिचालित किया गया। इसका भार तथा शुद्धता क्रमशः 180.234 और 135.215 ग्रेन ट्राय रखी गयी। देखने में ऐसा लगता था कि यह सही दिशा से भटक गया है। परंतु यहां भी शुद्धता के संबंध में एक रूपता का उद्धेश्य स्पष्ट था कि इससे मद्रास और बम्बई के नए रुपयों के समान फर्रुखाबाद का रुपया तैयार किया गया था और इसमें 11/12 शुद्धता थी। बनारस के रुपये से छुटकारा पाकर दूसरा कदम यह था कि फर्रुखाबाद रुपये के मानक को मद्रास और बम्बई के मानक में आत्मसात् कर दिया जाए जैसा कि आगे दी गई तालिका में दिखाया गया है।
इस प्रकार द्विधातु पद्धति रद्द किए बिना अधिकरण द्वारा प्रस्तावित आदर्श यूनिट (इकाई) को अस्तित्व में लाने के लिए ठोस कदम उठाए गए जैसा कि आगे दी गई तालिका में दिया गया।
ऽ देखिए-फोर्ट सेंट जार्ज पब्लिक डिपार्टमेंट, कन्सलटेशन्स, नं. 19, 7 जनवरी, 1818 † देखिए बम्बई फाईनेंसियल कन्सलटेशन्स, 6 अक्तूबर, 1824
‡ ब्ांगाल रेग्यूलेशन 11, 1819