1. दोहरे मानक से रजत मानक तक - Page 49

34 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

दोनों ओर किसी ठोस परिवर्तन के बिना भी यों ही चलती रहती। 1833 में भारत के तीनों महाप्रांतों की सरकारों के मध्य प्रशासनिक संबंधों में महत्वपूर्ण संवैधानिक परिवर्तन हुआ। उस वर्ष संसद के एकऽ अधिनियम द्वारा प्रशासन में साम्राज्यवादी पद्व ति स्थापित की गई जिसके अनुसार समस्त भारत में सभी विधायकी और कार्यकारी प्राधिकारी का केन्द्रीकरण किया गया। इस प्रशासकीय पद्धति के परिवर्तन के कारण प्रचलित मुद्रा पद्धतियों में परिवर्तन भी करना पड़ा। इसके अनुसार स्थानीय सिक्कों के स्थान पर साम्राज्यवादी सिक्के लाए गए। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि इसने आम मुद्रा को एकरूप मुद्रा के स्थान में अधिक बढ़ा दिया। भारत के प्राधिकारियों ने घटनाचक्र की शक्ति को स्वीकारने में कोई देरी नहीं की। संसद द्वारा स्थापित साम्राज्यवादी सरकार मुगलों के दीवान अथवा दलाल के रूप में कार्य करने से संतुष्ट नही थी जैसा कि अंग्रेज अब तक करते आए थे, उन्होंने इस बात को पसंद नहीं किया कि सिक्कों को उन मृतप्राय मुगल सम्राटों के नाम पर जारी किया जाय जो अब शासन नही करते। [†] वह इस बात के लिए आतुर थी कि झूठा चोगा उतार फेंका जाए और अपने ही नाम का साम्राज्यवादी सिक्का जारी किया जाए जो समस्त भारत के लिए समान हो जो समान आधिपत्य का प्रतीक होगा तदनुसार इस नीति को कार्य रूप में परिणित करने के लिए जल्दी ही कदम उठाए गए। साम्राज्यवादी सरकार के अधिनियम (1835 के 17) द्वारा समस्त भारत के लिए आम सिक्का जो एक मात्र विधिमान्य चलार्थ था लाया गया। परंतु साम्राज्यवादी सरकार इससे भी आगे बढ़ गई और जैसे कि वह अधिकरण को कोई छूट दे रही हो क्योंकि अधिकरण ने इस आम मुद्रा के विरुद्ध जोरदार विरोध किया जहां तक इसने सिक्का [‡] रुपये को विस्थापित किया और कानून बनाया कि ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकार क्षेत्र में से आगे से सोने के सिक्के को विधिमान्य चलार्थ नहीं माना जाएगा। [§]

यह बात बिल्कुल समझने योग्य है कि साम्राज्यवादी प्रशासन को आवश्यकता की मांग के अनुसार भारत भर के लिए आम मुद्रा की स्थापना की ओर अग्रसर होना पड़ा। परंतु यह स्पष्ट नहीं है कि उसने द्वि-धातु की पद्धति को क्यों समाप्त कर दिया जबकि इतने अधिक समय से उसका परिचालन होता रहा था। वास्तव में जब इस बात का स्मरण किया जाए कि द्वि-धातु पद्धति के समाप्त करने के विरुद्ध

ऽ 3 तथा 4 विलियम 4 देखिए 85

† देखिए दि सेंटीमैंटस ऑफ टुकर इन हिस मैमोरियल्स ऑफ इंडियन गवर्नमेंट (एडिटिड वाई काये) 1853

पृष्ठ 17-18

‡ देखिए दियर फाइनेंशियल डिस्पैच टु इंडिया संख्या 4 दिनांक 27-7-1836

§ सैक्शन 9 ऑफ एक्ट 17 ऑफ 1835