1. दोहरे मानक से रजत मानक तक - Page 55

40 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इस पद्धति के वित्तीय संबंधी आकस्मिक भाव-परिवर्तन किसी भी अन्य देश की तुलना में अधिक बारबार और गंभीर हुए और इसके अनिष्टकारी प्रभाव इंग्लैंड की तुलना में हॉलैंड में थोड़े कम महसूस किए गए। उन्होंने दृढ़तापूर्वक कहा कि चांदी के मानक की स्वीकृति से इंग्लैंड को इस बात से अलग रखा जाएगा कि वह इस प्रकार के आकस्मिक भाव-परिवर्तन के दौरान अपनी मुद्रा को हटाने से हॉलैंड के आंतरिक व्यापार में उथल-पुथल नहीं होगी तथा उन अवगुणों से उन्मुक्ति मिलेगी जो हॉलैंड में पैदा नहीं हुए थे और जिनके लिए हॉलैंड उत्तरदायी नहीं था। ख्1,

परंतु स्थायित्व ही ऐसा आधार नहीं था जिसके द्वारा अधिकरण अथवा लॉर्ड लिवरपूल ने अन्य धातुओं की तुलना में मानक धातु को अपना विकल्प बनाया। यदि ऐसा ही मामला होता तो शायद दोनों ने ही चांदी का चयन किया होता। जैसी की स्थिति थी, दोनों पक्षों के विकल्प का अंतर केवल उथला था, अधिकरण का लॉर्ड लिवरपूल से मतभेद था इसमें कोई खराब इरादा नहीं था परंतु वे दोनों एक आधारभूत प्रस्ताव पर सहमत हो गए थे कि मानक धातु के चयन में ही नहीं अपितु लोकप्रिय वरीयता भी निर्णायक थी। इस समझौते के कारक या तर्कसंगत रूप से उनमें उत्तर दिखने लगे। मुद्रा के सम्मिश्रण का विश्लेषण करने पर यह पता लगा कि इंग्लैंड में अधिकांशतया मुद्रा सोने में बनाई गई थी और भारत में अधिकतर मुद्रा चांदी में बनाई गई थी। यदि उनके आधार वाक्य को स्वीकार कर लिया जाए तो यह बताना सरल काम है कि लिवरपूल द्वारा इंग्लैंड में सोने को क्यों चुना गया और अधिकरण द्वारा भारत में चांदी को क्यों चुना गया। क्या मुद्रा का वास्तविक मिश्रण लोकप्रिय वरीयता का साक्ष्य है, इस बात को उस हठधर्मिता से नहीं कहा जा सकता जैसे कि अधिकरण और लॉर्ड लिवरपूल द्वारा किया गया था। जहां तक इंग्लैंड का संबंध है, लॉर्ड लिवरपूल की व्याख्या के बारे में महान अर्थशास्त्री डेविड रिकार्डो ने प्रश्न चिन्ह लगाया है। रिकार्डो ने अपने ‘‘हाई प्राइस ऑफ बुलियन’’ में लिखा है-

‘‘लॉर्ड लिवरपूल ने अनेक कारण दिये जिनके अनुसार बिना किसी मतभेद से यह सिद्ध हो जाता है कि सोने का सिक्का लगभग एक शताब्दी से मूल्य का प्रमुख साधन रहा है परंतु मेरे विचार से इसका श्रेय टकसाल के गलत अनुपातों को जाता है, सोने का बहुत अधिक मूल्य रखा गया, इसलिए चांदी अपने मानक पर भी परिचालन में रह सकती है। यदि नया विनिमय बनाया जाता और चांदी का मूल्य अधिक होता

  1. रिपोर्ट ऑफ दि यू. एस. सिल्वर कमेटी, 1876 पृष्ठ 68