68 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
8 करोड़ ख्1, निर्धारित की गई परन्तु निवेश के भाग में बढ़ती हुई वृद्धि कुछ भी क्यों न हो, फिर भी इस पर आधारित न्यासी इशू इतना अधिक नहीं था ताकि भारतीय कागजी मुद्रा कानून (इंडियन पेपर करेंसी लॉ) के आवश्यक नियम को रद्द किया जाए। इसका उद्देश्य यह था कि कागजी मुद्रा की मात्रा को इतना नियमित किया जाए कि वह सदैव एक ही तरीके में संकुचन और प्रवर्धन द्वारा अपने मूल्य को सुरक्षित रखे जैसा कि धातु के सिक्के को इसी सीमा तक सुरक्षित रखा जाता है।
इस प्रकार का मिश्रित मुद्रा का संगठन था जो उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम वर्षों के महान परिवर्तन के पूर्व भारत में विद्यमान था। यद्यपि यह मिश्रित प्रकार का था, कागजी हिस्सा कुल मुद्रा का तुलनात्मक दृष्टि से एक लघु अंश था। कागजी मुद्रा अधिक अनुपात में क्यों नहीं फैली इसका मुख्य कारण कागजी मुद्रा के संगठन में ही
खोजे जा सकते है। ख्2, एक कारण यह था कि नोटों का सबसे कम मूल्य का नोट भी इतने बड़े मूल्य का था कि वह धातु की मुद्रा का स्थान नहीं पा सकता था। 1861 के कानून के अनुसार 10 रुपये का 10 छोटे नोट के अंश से लेकर ऊपर के 20, 50, 100, 500 और 1000 रुपए के नोट तक परिचालित थे। ऐसे देश में जहां पर औसत लेन-देन एक रुपये से अधिक मूल्य का नहीं हो पाता है और न्यूनतम एक आना या इससे भी कम मूल्य का होता है। इस बात की आशा करना असंभव है कि कागजी मुद्रा लोगों के लेन-देन के रूप में कोई महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता। यहां तक कि प्रथम बार वर्ष 1871 ख्3, में स्वीकृत 5 रुपये के नोट भी लोगों के आर्थिक जीवन में प्रवेश नहीं कर सका। कागजी मुद्रा की वृद्धि में अन्य बाधा नोटों को नकदी में बदलने की थी। भारत में कागजी मुद्रा की अनुपयुक्तता की घटनाओं में से एक घटना इस तथ्य में निहित थी कि उन्हें एक वृत्त में सर्वत्र विधिमान्य चलार्थ
- आगे दी गई तालिका में तीन अलग-अलग अवधियों में कागजी मुद्रा रिजर्व (पेपर करेंसी रिजर्व) के
वितरण को दिखाया गया हैः कुल परिचालन की तुलना में
| vofèk | UkksV ifjpkyu |
fjtoZ dk la;kstu fjtoZ ds izR;sd Hkkx dk izfr'kr | Col4 | Col5 | Col6 | Col7 | Col8 | Col9 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| vofèk |
UkksV ifjpkyu |
pkanh lksuk izfrHkwfr;ka |
pkanh lksuk izfrHkwfr;ka |
pkanh lksuk izfrHkwfr;ka |
;ksx pkanh lksuk izfrHkwfr;ka |
;ksx pkanh lksuk izfrHkwfr;ka |
;ksx pkanh lksuk izfrHkwfr;ka |
;ksx pkanh lksuk izfrHkwfr;ka |
| 1862&1871 1872&1881 1882&1891 |
7-63 11-82 15-74 |
4-80 5-98 9-64 |
0-03 & & |
2-80 5-84 6-10 |
7-63 11-82 15-74 |
63 51 61 |
& & |
37 49 39 |
- भारत में कागजी मुद्रा के संगठन का स्पष्ट और सारांश में स्क्रेच, देखिएµ यू.एस. डायरेक्टर ऑफ मिंट,
वाशिंगटन, 1894, पृष्ठ 231-33 की रिपोर्ट में भारत सरकार की टिप्पणी 3. एक्ट III की धारा 3