अध्याय 5. आर्यों के विरुद्ध कार्य - Page 101

86 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाड्ख्.,मय

है कि आर्यों ने आर्यों को ही विजित किया हो। अतः इस संदर्भ में कि किस आर्य जाति के पास और दस्यु जाति पर विजय प्राप्त की उसका अनुसंधान आवश्यक है।

जैसाकि स्पष्ट है, यह निष्कर्ष पश्चिमी लेखकों के सिद्धांत तथ्यों के अपर्याप्त अन्वेषण से उतावली में निकाले गए निष्कर्ष पर आधारित हैं। प्राचीन आर्यों की अनुमानित मान्यताओं एवं उनके तथाकथित वंशज भारतीय जर्मन जातियों की मान्यताओं के आधारों में समानता एकरूपता के पूर्व स्थापित मत के आधार पर इसको सत्य मान लिया गया है। यह सिद्धांत केवल कुछ सुनी सुनाई बातों को अंतिम साक्ष्य मानकर निर्धारित किया गया है। वास्तव में गंभीर चिंतकों, शोधाकर्ताओं के लिए अप्रमाणित आधार पर प्रतिपादित यह पाश्चात्य सिद्धांत दीर्घकाल तक मान्य रहा है, यह असाधारण है। इस अध्याय में चर्चित नवीन प्रमाणों के समक्ष तो यह टिक ही नहीं सकता। अतः अमान्य है।